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इमरजेंसी पैरोल पर आजमगढ़ जाना चाहता है अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम, जानें आखिर क्यों

अबू सलेम
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देश की जेलों में बंद चर्चित कैदियों की पैरोल को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पैरोल मिलने के बाद अब अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम का नाम सुर्खियों में है। महाराष्ट्र की जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम ने अपने बड़े भाई के निधन के बाद इमरजेंसी पैरोल की मांग की है। उसने प्रशासन से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित अपने परिवार से मिलने की अनुमति देने की अपील की है।

बड़े भाई के निधन के बाद भावनात्मक अपील

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू सलेम के बड़े भाई का हाल ही में निधन हो गया है। इस पारिवारिक दुख के चलते उसने जेल प्रशासन के समक्ष इमरजेंसी पैरोल का आवेदन दिया है। अबू सलेम ने अपनी याचिका में कहा है कि वो अपने परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में शामिल होना चाहता है और अंतिम संस्कार से जुड़े पारिवारिक संस्कारों में मौजूद रहना चाहता है।

महाराष्ट्र की जेल में बंद है अबू सलेम

अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम इस समय महाराष्ट्र की जेल में सजा काट रहा है। वो कई गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है, जिनमें मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले और संगठित अपराध शामिल हैं। भारत प्रत्यर्पण के बाद से ही अबू सलेम हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद है और उसकी हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।

क्या होती है इमरजेंसी पैरोल?

इमरजेंसी पैरोल आमतौर पर कैदियों को किसी बेहद जरूरी पारिवारिक परिस्थिति में दी जाती है, जैसे माता-पिता, भाई-बहन या करीबी रिश्तेदार का निधन। हालांकि, इस तरह की पैरोल देना पूरी तरह प्रशासन और संबंधित अदालत के विवेक पर निर्भर करता है। इसमें कैदी के आपराधिक रिकॉर्ड, सुरक्षा जोखिम और कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता

अबू सलेम जैसे हाई-प्रोफाइल अपराधी की पैरोल को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्क रहती हैं। आजमगढ़ पहले भी कई बार अपराध और कट्टरपंथ से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में यदि अबू सलेम को पैरोल दी जाती है, तो उसकी सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ सकता है।

राम रहीम के बाद पैरोल पर फिर सवाल

गौरतलब है कि हाल के दिनों में राम रहीम को मिली पैरोल के बाद पैरोल नीति को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे हैं। अब अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल की मांग ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या सजायाफ्ता और हाई-प्रोफाइल कैदियों को इस तरह की राहत दी जानी चाहिए।

प्रशासन के फैसले का इंतजार

फिलहाल अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल याचिका पर जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा विचार किया जा रहा है। अंतिम फैसला सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। अब ये देखना अहम होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या अबू सलेम को आजमगढ़ जाने की अनुमति मिलती है या नहीं।

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