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अमेरिका-ईरान जंग और गहराता ऊर्जा संकट: भारत के लिए राहत की पहली किरण

अमेरिका-ईरान जंग
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अमेरिका-ईरान जंग: दुनिया इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें तेज कर दी हैं, खासकर भारत जैसे देश के लिए जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। लेकिन इस तनावपूर्ण माहौल के बीच मुंबई के बंदरगाह से एक ऐसी खबर आई है जिसने देश को बड़ी राहत दी है।

1. होर्मुज की बाधा पार कर पहुंचा ‘शेनलॉन्ग सुएजमैक्स’

28 फरवरी को जंग की शुरुआत के बाद से पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) पर टिकी थीं, जिसे ‘दुनिया की तेल धमनी’ कहा जाता है। इस खतरनाक रास्ते को पार कर लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर ‘शेनलॉन्ग सुएजमैक्स’ गुरुवार को मुंबई पहुंच गया।

लोड: यह जहाज सऊदी अरब से 1.35 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है।

गंतव्य: इस कच्चे तेल को मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में प्रोसेस किया जाएगा, जिससे एलपीजी और अन्य ईंधनों की आपूर्ति सुगम होगी।

महत्व: युद्ध शुरू होने के बाद इस मार्ग से सुरक्षित भारत पहुंचने वाला यह पहला बड़ा टैंकर है, जो एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत की तरह देखा जा रहा है।

2. कूटनीति की मेज पर भारत की सक्रियता

जब युद्ध के मैदान में मिसाइलें चल रही हों, तब समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना केवल सेना के बस की बात नहीं होती। यहाँ भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ काम आई है।

 जयशंकर-अरागची वार्ता: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से सीधे संवाद किया। मुख्य मुद्दा था—होर्मुज से भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट: रिपोर्टों के अनुसार, भारत करीब 20 और टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकालने के लिए बातचीत कर रहा है। यदि यह सफल होता है, तो देश में ईंधन की किल्लत का डर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

3. सरकार का दावा: “भंडार पर्याप्त है”

एक ओर जहाँ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) इस स्थिति को “इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” बता रही है, वहीं भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को आश्वस्त किया है।

भारत के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) मौजूद है। घबराने की जरूरत नहीं है।”

मौजूदा संकट के मुख्य बिंदु

पहलू स्थिति

वैश्विक स्थिति IEA के अनुसार अब तक का सबसे बड़ा संकट।

भारतीय कूटनीति ईरान के साथ लगातार संपर्क और सुरक्षित गलियारे की मांग।

आपूर्ति 1.35 लाख मीट्रिक टन तेल की खेप मुंबई पहुंची।

बाजार प्रभाव एलपीजी संकट की आशंकाओं के बीच कीमतों में स्थिरता की उम्मीद।

सावधानी और समाधान

यद्यपि ‘शेनलॉन्ग सुएजमैक्स’ का आना एक बड़ी जीत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। भारत जिस तरह से संतुलित कूटनीति और त्वरित लॉजिस्टिक मैनेजमेंट का प्रदर्शन कर रहा है, वह सराहनीय है। होर्मुज जलमार्ग का खुला रहना न केवल भारत बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘लाइफलाइन’ है।

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