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युद्ध की तपिश: होर्मुज संकट से भारत की 30% गैस सप्लाई बाधित, एअर इंडिया के बढ़े दाम; पर रसोई गैस सुरक्षित

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब भारतीय घरों और व्यापार पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों में तनाव के कारण होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही ठप हो गई है, जिससे भारत की 6 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MSCMD) गैस आपूर्ति बाधित हो गई है। यह भारत की कुल दैनिक खपत का लगभग 30% हिस्सा है।

महंगाई का दोहरा वार: आसमान छूता हवाई किराया
युद्ध के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। सोमवार को जो कच्चा तेल 118 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया था, वह मंगलवार को गिरकर 90 डॉलर के आसपास तो आया, लेकिन अनिश्चितता बरकरार है। इसी दबाव के बीच एअर इंडिया ने गुरुवार से हवाई किरायों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है, जिससे आम यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।

सरकार का ‘प्रायोरिटी प्लान’: किसे मिलेगी कितनी गैस?
गैस आपूर्ति में आई इस बड़ी गिरावट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने मंगलवार को गैस आवंटन (Gas Allocation) की नई प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। सरकारी गैस कंपनी गेल (GAIL) को इस पूरे प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आवंटन की नई रूपरेखा:
घरेलू रसोई (LPG/PNG) और सीएनजी: मांग का 100% (कोई कटौती नहीं होगी)।
कमर्शियल उपयोगकर्ता: मांग का केवल 80% आवंटन।
उर्वरक (Fertilizer) इकाइयां: जरूरत का केवल 70% हिस्सा।
नोट: यह आवंटन पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर तय किया जाएगा।

‘चूल्हा नहीं बुझेगा’: घरेलू एलपीजी की कमी का डर खत्म
हाल ही में कमर्शियल सिलेंडरों की कमी को लेकर उठ रही चिंताओं पर सरकार ने विराम लगा दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, रिफाइनरियों ने विशेष निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 10% की बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का दावा है कि घरेलू रसोई गैस और सीएनजी की सप्लाई में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

भारत की गैस अर्थव्यवस्था: एक नजर में
विवरण आंकड़े

कुल दैनिक गैस खपत 19.1 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर
आयात पर निर्भरता लगभग 50%
होर्मुज जलमार्ग से बाधित आपूर्ति 6 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (30%)
कच्चे तेल की वर्तमान स्थिति $90 – $118 प्रति बैरल (अस्थिर)

सावधानी और प्रबंधन का दौर
यद्यपि सरकार ने घरेलू मोर्चे पर एलपीजी की कमी न होने का आश्वासन दिया है, लेकिन कमर्शियल और खाद (फर्टिलाइजर) सेक्टर में कटौती का असर आने वाले समय में अन्य वस्तुओं की कीमतों पर दिख सकता है। होर्मुज जलमार्ग का संकट कब तक खिंचता है, इस पर भारत की भविष्य की आर्थिक रणनीति निर्भर करेगी।

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