दुनिया के सबसे चर्चित उद्यमियों में शामिल एलन मस्क ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव करते हुए घोषणा की है कि उनकी कंपनी स्पेसएक्स अब मंगल ग्रह के बजाय चांद पर इंसानी बस्ती बसाने पर प्राथमिकता से काम करेगी। मस्क के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले 10 वर्षों के भीतर चांद पर एक आत्मनिर्भर मानव बस्ती स्थापित की जा सकती है।
मंगल मिशन फिलहाल टला, चांद पर फोकस
स्पेसएक्स लंबे समय से मंगल ग्रह पर मानव मिशन भेजने की योजना पर काम कर रही थी। हालांकि अब कंपनी ने इस योजना को अस्थायी रूप से टाल दिया है। एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि चांद पर ऐसी सिटी बनाने की योजना है जो समय के साथ खुद-ब-खुद विस्तार कर सके।
मस्क के मुताबिक, मंगल ग्रह पर सिटी बसाने में 20 वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है, जबकि चांद पर ये लक्ष्य 10 साल से कम समय में हासिल किया जा सकता है।
रणनीतिक बदलाव की वजह
मस्क ने इस बदलाव के पीछे लॉजिस्टिक्स को प्रमुख कारण बताया है। उनके अनुसार, मंगल ग्रह पर जाने के लिए ग्रहों की स्थिति अनुकूल होना जरूरी है, जो लगभग हर 26 महीने में एक बार होता है। इसके विपरीत, चांद पर मिशन लगभग हर 10 दिन में लॉन्च किया जा सकता है।
इससे आपूर्ति, निर्माण सामग्री और मानव संसाधन भेजना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही कारण है कि स्पेसएक्स ने चांद को प्राथमिकता दी है।
नासा और अमेरिकी नीति से मेल
स्पेसएक्स, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की प्रमुख निजी साझेदार कंपनियों में से एक है। नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत 2027 तक अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद की सतह पर भेजने की योजना है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेश में भी 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने का लक्ष्य रखा गया था। ऐसे में स्पेसएक्स की नई योजना अमेरिकी अंतरिक्ष नीति के अनुरूप मानी जा रही है।
मंगल मिशन पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि स्पेसएक्स ने मंगल मिशन को बंद नहीं किया है। मस्क ने स्पष्ट किया है कि मंगल ग्रह कंपनी के दीर्घकालिक विजन का हिस्सा बना रहेगा। उनका कहना है कि अगले 5 से 7 वर्षों में मंगल पर सिटी बसाने की दिशा में काम शुरू किया जा सकता है।
गौरतलब है कि मस्क ने अतीत में मंगल मिशन की समय-सीमा कई बार बदली है। वर्ष 2016 में उन्होंने 2024 तक मानव मिशन भेजने की संभावना जताई थी, जबकि 2011 में उन्होंने 10 से 20 वर्षों के भीतर मंगल पहुंचने का अनुमान लगाया था।
चांद तक पहुंचने का खर्च कितना?
चांद पर मानव बस्ती बसाने की राह तकनीकी के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है।
सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए चांद की कक्षा तक पहुंचने में 100 अरब डॉलर से अधिक खर्च हो सकता है।
निजी कंपनियों द्वारा चांद की कक्षा में यात्रियों को ले जाने की प्रति सीट लागत 100 मिलियन से 750 मिलियन डॉलर के बीच आंकी जाती है।
1969 में अपोलो 11 मिशन का खर्च उस समय लगभग 350 मिलियन डॉलर था, जो आज के मूल्य में करीब 250 अरब डॉलर के बराबर माना जाता है।
नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम की अनुमानित लागत लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अंतरिक्ष उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि चांद पर स्थायी बस्ती बसाना तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर, जीवन समर्थन प्रणाली, ऊर्जा स्रोत और नियमित आपूर्ति तंत्र की आवश्यकता होगी।
स्पेसएक्स द्वारा विकसित किए जा रहे लूनर लैंडर और पुन: प्रयोज्य रॉकेट इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि परियोजना की समय-सीमा और लागत को लेकर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
चांद पर पहली बार जुलाई 1969 में अपोलो 11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रांग ने कदम रखा था। अब लगभग छह दशक बाद फिर से चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति की चर्चा तेज हो गई है।
यदि स्पेसएक्स की योजना सफल होती है, तो ये मानव इतिहास में एक नया अध्याय साबित हो सकता है, जहां चांद केवल वैज्ञानिक मिशनों का केंद्र नहीं, बल्कि इंसानी बस्ती का नया ठिकाना बन सकता है।
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