NEET-PG-2025 के नतीजों के बाद मेडिकल छात्रों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले को लेकर हो रही है, वो है क्वालिफाइंग कट-ऑफ में की गई बड़ी कटौती। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेस द्वारा तीसरे राउंड की काउंसलिंग से पहले कट-ऑफ को लेकर जो बदलाव किए गए हैं, उन्होंने कई छात्रों को चौंका दिया है। खास तौर पर ये सवाल उठ रहा है कि क्या बहुत कम नंबर, यहां तक कि निगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवारों को भी अब पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिले का मौका मिल सकता है?
बदल गए हैं हालात
दरअसल, NEET-PG परीक्षा में अब तक एक तय क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल सिस्टम लागू था। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 50 पर्सेंटाइल, दिव्यांग श्रेणी के लिए 45 पर्सेंटाइल और आरक्षित वर्ग के लिए 40 पर्सेंटाइल अनिवार्य मानी जाती थी। इससे कम स्कोर करने वाले उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे। लेकिन इस साल हालात कुछ अलग रहे।
शून्य पर्सेंटाइल तक लाया गया कट-ऑफ
पहले और दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद देश भर के मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में PG सीटें खाली रह गईं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद NBEMS ने तीसरे राउंड के लिए कट-ऑफ में अभूतपूर्व कटौती का फैसला लिया। इस संशोधित फैसले के तहत कुछ श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को शून्य पर्सेंटाइल तक लाया गया है।
यहां सबसे जरूरी बात समझने की है कि शून्य पर्सेंटाइल का मतलब सीधे एडमिशन नहीं होता। इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि अब ऐसे उम्मीदवार भी काउंसलिंग में भाग लेने के योग्य हो गए हैं, जो पहले न्यूनतम पात्रता भी पूरी नहीं कर पा रहे थे। यदि किसी उम्मीदवार के अंक बहुत कम हैं या निगेटिव स्कोर है, तब भी वो अब तीसरे राउंड की काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन कर सकता है।
हालांकि, काउंसलिंग में शामिल होना और सीट मिलना दो अलग बातें हैं। मेडिकल कॉलेज में किसी भी ब्रांच की सीट अलॉटमेंट अब भी मेरिट, उपलब्ध सीटों और उम्मीदवार की प्राथमिकताओं के आधार पर ही होगी। इसका मतलब ये हुआ कि बहुत कम अंक वाले उम्मीदवारों को सीट मिलना तभी संभव है, जब ऊंची रैंक वाले उम्मीदवार उन सीटों को न भरें।
सरकार और परीक्षा बोर्ड का तर्क है कि देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए ये जरूरी है कि प्रशिक्षण सीटें खाली न रहें। मेडिकल शिक्षा की क्षमता का पूरा उपयोग हो, इसी उद्देश्य से ये फैसला लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि काउंसलिंग प्रक्रिया खुली रखने से कम से कम सभी सीटें भरने का मौका मिलेगा।
छात्रों के लिए ये फैसला उम्मीद और भ्रम, दोनों लेकर आया है। कुछ उम्मीदवारों को लगता है कि अब उनके लिए भी रास्ता खुला है, जबकि कई मेडिकल संगठनों और विशेषज्ञों ने योग्यता और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल, तीसरे राउंड की काउंसलिंग में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया का पालन करना होगा और सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ पंजीकरण कराना होगा। अंतिम फैसला काउंसलिंग के नतीजों और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, ये साफ है कि -40 नंबर या बहुत कम अंक लाने वाले उम्मीदवारों को सीधे एडमिशन की गारंटी नहीं मिली है, लेकिन उनके लिए काउंसलिंग का दरवाजा जरूर खुला है। ये फैसला मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में एक असाधारण कदम माना जा रहा है, जिसके असर पर आने वाले समय में गंभीर बहस हो सकती है।
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