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यरुशलम में बस स्टॉप पर ताबड़तोड़ गोलीबारी, 5 की मौत, 15 घायल, इलाके में दहशत

यरुशलम
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इजराइल की राजधानी यरुशलम सोमवार सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। उत्तरी यरुशलम के एक व्यस्त बस स्टॉप पर दो हमलावरों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग घायल हो गए। घायलों में से 6 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

हमला कैसे हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों और पैरामेडिक्स के अनुसार, सुबह के व्यस्त समय में लोग बस स्टॉप पर इंतजार कर रहे थे। तभी दो हथियारबंद हमलावरों ने वहां अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने पास खड़ी एक बस में भी घुसकर यात्रियों पर फायरिंग की।

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद पुलिस, एक सुरक्षा अधिकारी और एक नागरिक ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों हमलावरों को ढेर कर दिया। हालांकि, हमलावरों की पहचान और संगठन से जुड़ी जानकारी को लेकर पुलिस ने आधिकारिक बयान देने से इनकार किया है।

घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल
हमले के बाद इलाके में हाहाकार मच गया। फुटपाथ पर टूटे शीशे और घायल लोगों के शरीर पड़े थे। कई लोग खून से लथपथ जमीन पर तड़प रहे थे, तो कई घबराकर भागते नजर आए। पैरामेडिक्स ने बताया कि पूरा चौराहा अफरा-तफरी के माहौल में बदल गया था।

गाजा युद्ध और बढ़ती हिंसा का असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं गाजा युद्ध के बाद से तेजी से बढ़ी हैं। पश्चिमी तट और इजराइल दोनों जगह हिंसा का स्तर ऊंचा हुआ है। जहां फिलिस्तीनी उग्रवादी इजराइलियों पर हमले कर रहे हैं, वहीं जवाबी कार्रवाई में इजराइली सेना और नागरिक भी फिलिस्तीनियों पर हमला कर रहे हैं।

पिछली बड़ी घटना की याद
यरुशलम में ये पहली बार नहीं है कि सार्वजनिक जगह पर गोलीबारी हुई हो। अक्टूबर 2024 में भी एक घातक हमला हुआ था जब वेस्ट बैंक के दो फिलिस्तीनियों ने तेल अवीव क्षेत्र में एक बुलेवार्ड और लाइट रेल स्टेशन पर फायरिंग कर दी थी। उस हमले में 7 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे। हमास की सैन्य शाखा ने उस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

आंकड़े क्या कहते हैं?
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यालय के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से लेकर जुलाई 2025 तक इजराइल और वेस्ट बैंक में हिंसा के कारण हालात बेहद भयावह बने रहे। इस दौरान कम से कम 49 इजराइली मारे गए, जबकि इजराइली सेना और नागरिकों की कार्रवाई में 968 से ज्यादा फिलिस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं।

यरुशलम की ये घटना दिखाती है कि इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की जान पर भी लगातार भारी पड़ रहा है।

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