मुंबई सिर्फ देश की आर्थिक राजधानी नहीं है, बल्कि यहां की नगर पालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी (BMC) भी अपनी आर्थिक ताकत के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखती है। हर बार जब बीएमसी चुनाव आते हैं, तो ये सवाल ज़रूर उठता है कि आखिर एक नगर निगम का चुनाव इतना अहम क्यों माना जाता है? तो इसकी सबसे बड़ी वजह है बीएमसी (BMC) का विशाल बजट और उससे जुड़ी प्रशासनिक शक्ति, जो इसे भारत की सबसे अमीर नगर पालिका बनाती है।
सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होता बजट
बीएमसी (BMC) का सालाना बजट कई छोटे राज्यों के बजट से भी बड़ा माना जाता है। ये बजट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए मुंबई जैसे महानगर की ज़िंदगी की हर बुनियादी ज़रूरत तय होती है। शहर को पानी की सप्लाई कहां से होगी, सड़कों की हालत कैसी रहेगी, अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था कैसी होगी, स्कूलों और सार्वजनिक ढांचे पर कितना खर्च होगा – इन सभी फैसलों की धुरी बीएमसी ही है।
आमदनी के कई श्रोत हैं?
BMC की आमदनी के स्रोत भी इसे बेहद मजबूत बनाते हैं। प्रॉपर्टी टैक्स, पानी और सीवेज टैक्स, निर्माण अनुमति शुल्क, विज्ञापन से होने वाली आय और राज्य व केंद्र से मिलने वाले अनुदान इसके प्रमुख राजस्व स्रोत हैं। मुंबई जैसे महानगर में रियल एस्टेट और कमर्शियल गतिविधियां इतनी व्यापक हैं कि बीएमसी को लगातार बड़ा राजस्व मिलता रहता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट के समय भी बीएमसी की वित्तीय स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रहती है।
प्रशासनिक अधिकार भी बहुत हैं
बीएमसी की ताकत केवल पैसे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रशासनिक अधिकार भी बेहद व्यापक हैं। शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था का बड़ा हिस्सा BMC के अधीन है। केईएम, नायर, सायन जैसे बड़े सरकारी अस्पताल बीएमसी द्वारा ही संचालित किए जाते हैं। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डिस्पेंसरी और महामारी नियंत्रण जैसी जिम्मेदारियां भी इसी संस्था पर होती हैं। कोरोना काल में बीएमसी की भूमिका ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा है दायरा
शिक्षा के क्षेत्र में भी बीएमसी का दायरा बड़ा है। हजारों बीएमसी स्कूल, शिक्षकों की नियुक्ति, मिड-डे मील जैसी योजनाएं और शहरी गरीब बच्चों की शिक्षा से जुड़े फैसले इसी निकाय के अंतर्गत आते हैं। साथ ही, मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था, झीलों और पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन भी बीएमसी की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी मजबूत प्रभाव
इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में BMC का प्रभाव सबसे ज़्यादा दिखाई देता है। सड़क निर्माण, पुल, ड्रेनेज सिस्टम, मानसून से पहले नालों की सफाई और बाढ़ नियंत्रण जैसे काम सीधे बीएमसी के नियंत्रण में होते हैं। हर साल बारिश के दौरान जब मुंबई ठहर जाती है, तो जनता की निगाहें सीधे BMC पर टिक जाती हैं। यही वजह है कि इस संस्था के फैसले सीधे आम नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं।
हर राजनीतिक पार्टी चाहती है नियंत्रण
इतनी आर्थिक और प्रशासनिक ताकत होने के कारण बीएमसी पर नियंत्रण राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम हो जाता है। बीएमसी में सत्ता का मतलब सिर्फ नगर निगम चलाना नहीं, बल्कि मुंबई जैसे शहर की दिशा तय करना भी है। यही कारण है कि हर चुनाव में बीएमसी की कुर्सी को लेकर सियासी घमासान देखने को मिलता है और बड़े-बड़े नेता भी इस चुनाव को हल्के में नहीं लेते।
कुल मिलाकर, बीएमसी को भारत की सबसे अमीर नगर पालिका यूं ही नहीं कहा जाता। इसका विशाल बजट, स्थायी आय के स्रोत, व्यापक प्रशासनिक अधिकार और देश की आर्थिक राजधानी पर नियंत्रण इसे बाकी नगर निकायों से बिल्कुल अलग और कहीं अधिक शक्तिशाली बनाते हैं। यही वजह है कि बीएमसी चुनाव सिर्फ स्थानीय राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी खास महत्व रखते हैं।
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