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मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था: BMC कैसे चलाती है देश का सबसे बड़ा वाटर नेटवर्क?

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मुंबई जैसे महानगर में पानी सिर्फ़ एक सुविधा नहीं, बल्कि शहर की जीवनरेखा है। करीब ढाई करोड़ की आबादी, लाखों दफ्तर, उद्योग, झुग्गी बस्तियां और ऊंची इमारतें – इन सभी तक रोज़ाना पानी पहुंचाना किसी भी नगर निकाय के लिए बड़ी चुनौती होती है। यही चुनौती बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC हर दिन उठाती है। देश के किसी भी शहर की तुलना में मुंबई का जल आपूर्ति नेटवर्क सबसे बड़ा और सबसे जटिल माना जाता है।

मुंबई को कैसे मिलता है पानी?
मुंबई की खास बात ये है कि शहर में पीने का पानी स्थानीय स्रोतों से नहीं, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित झीलों और बांधों से लाया जाता है। तुलसी, विहार, भातसा, अपर वैतरणा, मध्य वैतरणा और मोडक सागर जैसे जलाशय मुंबई की प्यास बुझाते हैं। इनमें से कुछ झीलें शहर से 100 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। VMC इन जलाशयों से विशाल पाइपलाइनों और सुरंगों के जरिए रोज़ाना करोड़ों लीटर पानी मुंबई तक पहुंचाती है।

कैसे होती है पानी की आपूर्ती?
बीएमसी का जल आपूर्ति विभाग चौबीसों घंटे काम करता है। पानी को शुद्ध करने के लिए कई स्तरों पर ट्रीटमेंट किया जाता है ताकि शहरवासियों को सुरक्षित और पीने योग्य पानी मिल सके। इसके बाद पानी को अलग-अलग ज़ोन और वार्डों में बांटा जाता है। ऊंचाई वाले इलाकों, झुग्गी क्षेत्रों और घनी आबादी वाले हिस्सों के लिए अलग-अलग दबाव और समय-सारणी के अनुसार पानी की सप्लाई की जाती है।

मुंबई की जल व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती है असमान वितरण। कुछ इलाकों में चौबीस घंटे पानी उपलब्ध है, जबकि कई बस्तियों में सीमित समय के लिए ही पानी पहुंचता है। बीएमसी इस अंतर को कम करने के लिए नई पाइपलाइन बिछाने, लीकेज रोकने और पुरानी लाइनों को बदलने का काम लगातार करती रहती है। हर साल मानसून से पहले पाइपलाइन की मरम्मत और जांच भी एक बड़ा अभियान होता है।

BMC की बड़ी समस्या क्या है?
पानी की चोरी और अवैध कनेक्शन भी बीएमसी के लिए बड़ी समस्या रहे हैं। खासकर झुग्गी इलाकों और निर्माण स्थलों पर अवैध जल कनेक्शन से न सिर्फ़ राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि दबाव कम होने से नियमित उपभोक्ताओं को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। बीएमसी समय-समय पर ऐसे कनेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई करती है और वैध कनेक्शन देने की प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश करती है।

जल संकट की आशंका हर साल गर्मियों में गहराने लगती है। बारिश कम होने पर झीलों के जलस्तर पर नजर रखी जाती है और जरूरत पड़ने पर पानी कटौती जैसे कड़े फैसले भी लिए जाते हैं। BMC की कोशिश रहती है कि कटौती न्यूनतम रहे, लेकिन बदलते मौसम और बढ़ती आबादी ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है।

क्यों खास है मुंबई की जल आपूर्ती?
मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि ये पूरी तरह नगर निगम के नियंत्रण में है। देश के कई बड़े शहरों में जल आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों या अलग बोर्डों की मदद ली जाती है, जबकि मुंबई में बीएमसी खुद इस विशाल नेटवर्क का संचालन करती है। यही कारण है कि पानी से जुड़ा हर मुद्दा सीधे बीएमसी की जिम्मेदारी बन जाता है और जनता की उम्मीदें भी उसी से जुड़ जाती हैं।

कुल मिलाकर, मुंबई का वाटर नेटवर्क सिर्फ पाइप और झीलों का जाल नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा सिस्टम है जो हर दिन शहर को ज़िंदा रखता है। सीमित संसाधनों, बढ़ती मांग और बदलते मौसम के बीच बीएमसी जिस तरह देश के सबसे बड़े जल आपूर्ति नेटवर्क को संभाल रही है, वो इसे बाकी नगर निकायों से अलग और बेहद अहम बनाता है। मुंबई की रफ्तार को बनाए रखने में पानी की ये व्यवस्था सबसे मजबूत आधार है।

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