महाराष्ट्र: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – अजित गुट) के कद्दावर नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने राज्य की सियासत में एक गहरा शून्य पैदा कर दिया है। इस दुखद खबर के बाद से ही महायुति सरकार और राकांपा के भीतर उत्तराधिकार को लेकर मंथन का दौर शुरू हो गया है। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसे दो महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए पार्टी के भीतर रणनीति बनाई जा रही है।
सुनेत्रा पवार: क्या होंगी अगली उपमुख्यमंत्री?
सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी) के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कठिन समय में पार्टी को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए परिवार के ही किसी सदस्य को आगे लाना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
- निर्विरोध नेतृत्व: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सुनेत्रा पवार के नाम पर संगठन के भीतर किसी भी तरह के विरोध की संभावना कम है।
- प्रफुल्ल पटेल और भुजबल की सक्रियता: गुरुवार को पार्टी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात को केवल औपचारिक संवेदना तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बारामती का किला और राज्यसभा से इस्तीफे की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यह है कि सुनेत्रा पवार अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे सकती हैं। यदि वे उपमुख्यमंत्री का पद संभालती हैं, तो उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा।
- बारामती से चुनाव: ऐसी संभावनाएं प्रबल हैं कि वे अजित पवार के पारंपरिक गढ़ बारामती विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।
- विरासत की राजनीति: पार्टी नेताओं का तर्क है कि बारामती की जनता का पवार परिवार के प्रति गहरा लगाव है। ऐसे में अजित दादा की विरासत को आगे ले जाने के लिए सुनेत्रा पवार को वहां व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है।
पार्टी के सामने चुनौतियां
अजित पवार केवल एक नेता नहीं, बल्कि राकांपा (अजित गुट) के मुख्य रणनीतिकार और ‘पावर सेंटर’ थे। उनके जाने से पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है:
- सरकार में पकड़: महायुति गठबंधन (BJP, शिवसेना-शिंदे और NCP) में अपनी ताकत और प्रभाव को बनाए रखना।
- संगठन का ढांचा: आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन की कमान किसी ऐसे हाथ में सौंपना जो सबको साथ लेकर चल सके।
अजित दादा का जाना पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। फिलहाल संगठन और सरकार में स्थिरता लाने के लिए सुनेत्रा पवार एक सबसे मजबूत और स्वीकार्य विकल्प नजर आ रही हैं।” — पार्टी के एक वरिष्ठ नेता
आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। क्या सुनेत्रा पवार अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए मंत्रालय की सीढ़ियां चढ़ेंगी? यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, सबकी निगाहें महायुति के शीर्ष नेतृत्व और राकांपा की कोर कमेटी के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।






























