तुंगारेश्वर: महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल तुंगारेश्वर महादेव मंदिर की तलहटी एक बार फिर भक्तिमय जयकारों से गूंजने के लिए तैयार है। पिछले 26 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को कायम रखते हुए, श्रीमती दुर्गावती ट्रस्ट द्वारा इस वर्ष भी भव्य महाप्रसाद वितरण और आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया जा रहा है जिसके अध्यक्ष दिनेश ओझा है।
दो दिवसीय भक्ति उत्सव का कार्यक्रम
यह विशेष कार्यक्रम शनिवार, 7 फरवरी से अत्यंत उत्साह के साथ शुरू होगा और रविवार, 8 फरवरी को इसका भव्य समापन होगा। इन दो दिनों के दौरान तुंगारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
- शनिवार, 7 फरवरी: कार्यक्रम का शुभारंभ और महाप्रसाद की शुरुआत।
- रविवार, 8 फरवरी: मुख्य उत्सव और बाल योगी सदानंद महाराज का आगमन।
बाल योगी सदानंद महाराज का दिव्य आशीर्वाद
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित क्षण रविवार का होता है, जब परम पूज्य बाल योगी सदानंद महाराज स्वयं भक्तों के बीच उपस्थित होते हैं। उनकी एक झलक पाने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों लोग यहाँ पहुँचते हैं। महाराज जी की उपस्थिति आयोजन की ऊर्जा को दोगुना कर देती है और भक्तों को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है।
सेवा की मिसाल: विशाल महाप्रसाद वितरण
श्रीमती दुर्गावती shesh Mani Ojha ट्रस्ट पिछले ढाई दशकों से भी अधिक समय से निरंतर जनसेवा का कार्य कर रहा है। इस अवसर पर आयोजित होने वाला महाप्रसाद वितरण केवल भोजन का वितरण नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का प्रतीक है।
- हजारों लाभार्थियों की संख्या: आयोजन के दौरान हजारों की संख्या में भक्त पंक्तिबद्ध होकर श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण करते हैं।
- निस्वार्थ सेवा: ट्रस्ट के स्वयंसेवक दिन-रात इस कार्य में जुटे रहते हैं ताकि कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ न जाए।
आयोजन का महत्व
तुंगारेश्वर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। ऐसे में ट्रस्ट द्वारा किया जाने वाला यह २६वाँ आयोजन न केवल क्षेत्र की धार्मिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि समाज में एकजुटता और परोपकार का संदेश भी फैलाता है। बाल योगी सदानंद महाराज के मार्गदर्शन और ट्रस्ट के प्रयासों ने इसे क्षेत्र के सबसे बड़े वार्षिक आयोजनों में से एक बना दिया है।
नोट: यदि आप इस आयोजन में शामिल होने जा रहे हैं, तो स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करें और प्रकृति की स्वच्छता का ध्यान रखें।































