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बोर्ड परीक्षाओं पर ‘समायोजन’ का साया, मुंबई मराठी अध्यापक संघ ने की स्थगित करने की मांग 

board exam
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बोर्ड परीक्षा: महाराष्ट्र में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मुहाने पर शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के ‘समायोजन शिविर’ आयोजित करने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। मुंबई मराठी अध्यापक संघ ने इस प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की है, ताकि परीक्षाओं के सुचारु संचालन में कोई बाधा न आए।

परीक्षा ड्यूटी या दफ्तर के चक्कर? शिक्षकों के सामने धर्मसंकट
संघ के अध्यक्ष अनिल बोरनारे ने बताया कि एक तरफ राज्य में बोर्ड की मौखिक और प्रायोगिक (Practical) परीक्षाएं चल रही हैं और अगले सप्ताह से लिखित परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में शिक्षा निदेशालय द्वारा राज्यभर में अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन का कार्यक्रम घोषित करना तर्कहीन है।

अवरोध के मुख्य कारण:

  • व्यस्तता: परीक्षाओं के दौरान शिक्षकों को केंद्रों पर उपस्थित रहना अनिवार्य है, लेकिन समायोजन प्रक्रिया के कारण उन्हें बार-बार शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
  • समय सीमा: आदेश के अनुसार जिला स्तर पर 3 मार्च और विभाग स्तर पर 25 मार्च को शिविर आयोजित होने हैं। इस दौरान बोर्ड परीक्षाएं अपने चरम पर होंगी।

संच मान्यता जीआर (GR) पर सवाल: ‘हजारों शिक्षक होंगे अतिरिक्त’
अध्यापक संघ ने 15 मार्च 2024 को जारी संच मान्यता संबंधी शासनादेश को “अन्यायकारक” करार दिया है। संगठन का आरोप है कि इस गलत जीआर के कारण शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की संच मान्यता में कई स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं होने के बावजूद शिक्षकों की संख्या ‘शून्य’ दिखाई गई है।

इस त्रुटिपूर्ण फैसले से अनुदानित और बिना अनुदानित स्कूलों की सैकड़ों कक्षाएं बंद होने की कगार पर हैं और हजारों शिक्षक अतिरिक्त (Surplus) घोषित किए जा रहे हैं। सरकार को हर विषय के लिए स्वतंत्र शिक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।” – अनिल बोरनारे, अध्यक्ष, मुंबई मराठी अध्यापक संघ

संघ की प्रमुख मांगें

  • प्रक्रिया पर रोक: बोर्ड परीक्षाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए समायोजन की समयबद्ध कार्रवाई को तुरंत रोका जाए।
  • GR में संशोधन: 15 मार्च 2024 के संच मान्यता आदेश में सुधार किया जाए ताकि शिक्षकों के रोजगार पर संकट न आए।
  •  परीक्षा पर ध्यान: सरकार फिलहाल अपना पूरा ध्यान 10वीं-12वीं की परीक्षाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराने पर केंद्रित करे।

शिक्षकों की कमी और परीक्षाओं के बोझ के बीच इस प्रशासनिक फैसले ने शिक्षकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग छात्रों के हित को देखते हुए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है या अध्यापक संघ की मांगों पर विचार करता है।

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