Mumbai Local: मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। पश्चिम रेलवे एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने जा रही है, जिसके चलते बांद्रा और गोरेगांव के बीच हार्बर लाइन सेवाएं करीब 90 दिनों यानी तीन महीने तक प्रभावित रह सकती हैं।
ये प्रस्तावित ‘महामेगा ब्लॉक’ शहर की दैनिक आवाजाही पर व्यापक असर डाल सकता है। ऐसे में यात्रियों के लिए ये जानना जरूरी है कि किन स्टेशनों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा और यात्रा के विकल्प क्या होंगे।
क्यों लिया जा रहा है 3 महीने का ब्लॉक?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये कदम बांद्रा और खार के बीच पांचवीं लाइन बिछाने के काम को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है। इस रूट पर मौजूद एक पुराना रेलवे पुल नए ट्रैक के निर्माण में बड़ी बाधा बना हुआ है।
पुल हटाए जाने के बाद मुंबई सेंट्रल से बोरीवली के बीच पांचवीं और छठी लाइन का अधूरा कार्य पूरा किया जा सकेगा। ये परियोजना लंबे समय से लंबित थी, जिसे अब अंतिम चरण में लाने की तैयारी है।
किन रूटों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
इस ब्लॉक का सीधा असर गोरेगांव–CSMT (हार्बर लाइन) रूट पर पड़ेगा।
वर्तमान में इस रूट पर लगभग 88 लोकल सेवाएं संचालित होती हैं।
ब्लॉक के दौरान ये सेवाएं संभवतः गोरेगांव तक नहीं जाएंगी।
कई ट्रेनों को बांद्रा स्टेशन पर ही समाप्त किया जा सकता है।
गोरेगांव, जोगेश्वरी और अंधेरी से दक्षिण मुंबई की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ेगा।
बढ़ सकती है भीड़ की समस्या
पश्चिम रेलवे की मेन लाइन या बस सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है। अंधेरी, बांद्रा और दादर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ बढ़ सकती है।
हालांकि राहत की बात ये है कि बांद्रा से CSMT के बीच हार्बर लाइन की सेवाएं जारी रहने की संभावना है। रेलवे इस खंड पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाने पर भी विचार कर रहा है ताकि यात्रियों को कुछ राहत मिल सके।
ब्लॉक कब से होगा लागू?
अभी तक इस मेगा ब्लॉक की सटीक तारीख घोषित नहीं की गई है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक योजना अंतिम मंजूरी के चरण में है। इतने बड़े स्तर पर शटडाउन लागू करने से पहले सुरक्षा जांच और विस्तृत प्लानिंग की जा रही है।
तारीखों की आधिकारिक घोषणा तकनीकी समीक्षा के बाद ही की जाएगी।
भविष्य में क्या होंगे फायदे?
भले ही तीन महीने तक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़े, लेकिन इस परियोजना के दीर्घकालिक फायदे बड़े होंगे।
लोकल और लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के ट्रैक अलग हो जाएंगे।
मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के कारण लोकल ट्रेनों में होने वाली देरी कम होगी।
अतिरिक्त ट्रैक से भविष्य में अधिक लोकल ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
चर्चगेट-बोरीवली-विरार कॉरिडोर पर यातायात और अधिक सुगम व तेज होगा।
यात्रियों के लिए क्या जरूरी?
यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे रेलवे की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें और वैकल्पिक यात्रा योजना पहले से तैयार करें।
मुंबई जैसे शहर में जहां हर मिनट की कीमत है, वहां तीन महीने का मेगा ब्लॉक चुनौती जरूर है, लेकिन भविष्य की बेहतर और तेज लोकल सेवा के लिए ये कदम अहम माना जा रहा है।
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