बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में बढ़ते ट्रैफिक संकट और सड़कों पर हो रहे अतिक्रमणों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अवैध निर्माण और सड़क किनारे हो रहे कब्जों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में शहर की स्थिति इतनी खराब हो सकती है कि लोगों को आवागमन के लिए साइकिल या यहां तक कि घोड़ों का सहारा लेना पड़ सकता है।
न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि महानगर में जिस तरह सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ रहे हैं, उससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। कई स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई घटकर एक या दो लेन तक सीमित रह गई है, जिसके कारण लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। अदालत ने टिप्पणी की कि कई बार जाम में फंसी गाड़ियों की तुलना में पैदल चलने वाला व्यक्ति अधिक तेजी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है।
पीठ ने ये भी सवाल उठाया कि यदि अतिक्रमण और अवैध कब्जों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो अगले दो दशकों में मुंबई की हालत क्या होगी। अदालत ने स्थानीय नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वो अतिक्रमण हटाने के मामले में बेबस नजर आता है और उसमें ठोस कार्रवाई करने का साहस दिखाई नहीं देता।
ये टिप्पणी उपनगरीय पवई क्षेत्र के एक स्कूल द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में स्कूल परिसर के आसपास हो रहे अतिक्रमणों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कथित निष्क्रियता पर चिंता जताई गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निकाय अधिकारियों से पूछा कि सड़कों पर अनधिकृत निर्माण आखिर कैसे हो रहे हैं। साथ ही संबंधित निगम उपायुक्त को शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
बीएमसी के वकील ने अदालत को बताया कि नगर निकाय ने पहले भी अतिक्रमण हटाने की कोशिश की थी, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने विरोध करते हुए हिंसक रवैया अपनाया और अधिकारियों को धमकाया। मामले की अगली सुनवाई आज निर्धारित है।






























