शेयर बाजार में कभी-कभी ऐसे उदाहरण सामने आते हैं जो निवेशकों को चौंका देते हैं। एक छोटे या तथाकथित ‘पेनी स्टॉक’ ने महज 22 महीनों में करीब 67,000 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न देकर निवेशकों को करोड़पति बना दिया। जिसने लगभग ₹1 लाख का निवेश किया था, उसकी रकम बढ़कर करीब ₹6 करोड़ तक पहुंच गई।
कैसे बना मल्टीबैगर?
करीब डेढ़ से दो साल पहले तक ये शेयर बेहद कम कीमत पर कारोबार कर रहा था। उस समय इसे बाजार में ज्यादा पहचान नहीं मिली थी। लेकिन कंपनी के बिजनेस में सुधार, विस्तार योजनाओं और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते शेयर में लगातार तेजी देखने को मिली।
मुख्य कारण जिनसे शेयर में उछाल आया:
कंपनी के कारोबार में तेज ग्रोथ
सेक्टर में मजबूत संभावनाएं
निवेशकों का बढ़ता भरोसा
लगातार अपर सर्किट लगना
धीरे-धीरे इस शेयर ने लंबी छलांग लगाई और कुछ ही महीनों में कई गुना बढ़ गया।
निवेश का गणित
अगर किसी निवेशक ने 22 महीने पहले इस शेयर में ₹1 लाख लगाए होते, तो मौजूदा ऊंचाई पर उसकी वैल्यू लगभग ₹6 करोड़ तक पहुंच जाती। यह करीब 67,000 प्रतिशत रिटर्न के बराबर है, जो शेयर बाजार में बेहद दुर्लभ माना जाता है।
हालांकि, इस तरह के रिटर्न आम तौर पर उच्च जोखिम के साथ आते हैं। पेनी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव बहुत तेज होता है और इनमें निवेश करना जोखिम भरा माना जाता है।
पेनी स्टॉक क्या होता है?
पेनी स्टॉक वे शेयर होते हैं जिनकी कीमत बहुत कम होती है और जिनमें तरलता (लिक्विडिटी) कम होती है। इनमें:
कीमत में तेज उतार-चढ़ाव होता है
जोखिम अधिक होता है
पारदर्शिता सीमित हो सकती है
अचानक बड़ी तेजी या गिरावट संभव होती है
ऐसे शेयर कम समय में बड़ा मुनाफा दे सकते हैं, लेकिन भारी नुकसान की संभावना भी उतनी ही रहती है।
क्या हर निवेशक को ऐसे शेयरों में पैसा लगाना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि:
बिना रिसर्च के निवेश से बचना चाहिए
कंपनी की फंडामेंटल स्थिति समझना जरूरी है
पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा हाई-रिस्क शेयरों में नहीं लगाना चाहिए
लंबी अवधि और जोखिम सहनशीलता का आकलन जरूरी है
मल्टीबैगर बनने वाले शेयर अक्सर शुरुआत में नजरअंदाज किए जाते हैं, लेकिन हर पेनी स्टॉक सफल हो, यह जरूरी नहीं है।
निवेशकों के लिए सीख
यह उदाहरण बताता है कि शेयर बाजार में संभावनाएं असीमित हैं, लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। समझदारी, धैर्य और रिसर्च के साथ किया गया निवेश ही लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है।
22 महीनों में 67,000 प्रतिशत रिटर्न देने वाला यह छोटा शेयर निवेशकों के लिए बड़ी कहानी बन गया है। हालांकि, ऐसे उदाहरण प्रेरक जरूर होते हैं, लेकिन निवेश से पहले जोखिम और बाजार की वास्तविकताओं को समझना बेहद जरूरी है।
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