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Shegaon: गजानन महाराज के चरणों में राष्ट्रपति, ‘आरोग्यं परमं सुखम्’ के मंत्र के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन का शंखनाद

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Shegaon: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को विदर्भ के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल शेगांव का दौरा किया। इस यात्रा के दो मुख्य पड़ाव रहे—पहला, संत श्री गजानन महाराज की समाधि के दर्शन और दूसरा, भारतीय ज्ञान परंपरा ‘आयुर्वेद व योग’ को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का आह्वान। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक संपूर्ण कला है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन: आयुर्वेद को ‘जन-आंदोलन’ बनाने की अपील
शेगांव के ‘विसावा भक्त निवास संकुल’ परिसर में आयुष मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति ने औषधि वनस्पतियों के संरक्षण पर जोर दिया।

  • संतुलित जीवन का मंत्र: राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, “मन और शरीर का संतुलन ही स्वस्थ जीवन का आधार है। योग और आयुर्वेद हमें वह मार्ग दिखाते हैं जिससे हम न केवल रोगों से बच सकते हैं, बल्कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण भी कर सकते हैं।”
  • जन-अभियान की आवश्यकता: उन्होंने आह्वान किया कि आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार केवल शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी न रहे, बल्कि यह एक ‘जन-अभियान’ बने। जब तक हर नागरिक अपनी जीवनशैली में इसे नहीं अपनाएगा, तब तक पूर्ण स्वास्थ्य का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है।
  • सांस्कृतिक सीख: ‘आरोग्यं परमं सुखम्’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि हमारी संस्कृति में शरीर को सभी कर्तव्यों को पूरा करने का मुख्य साधन माना गया है।

आयुष मंत्रालय के बढ़ते कदम
सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रमुख कदमों का उल्लेख किया:

  • अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना।
  • देश भर में आयुष औषधालयों का जाल बिछाना।
  • औषधि परीक्षण के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं का निर्माण।
  • वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के माध्यम से दुनिया को भारतीय ज्ञान से जोड़ना।

अध्यात्म और शांति: गजानन महाराज की समाधि पर नमन
स्वास्थ्य सम्मेलन के संबोधन के पश्चात, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संत श्री गजानन महाराज की समाधि के दर्शन किए। मंदिर परिसर में उन्होंने कुछ समय ध्यान लगाया और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। संस्थान की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति की इस यात्रा ने न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी विदर्भ क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

एक नजर में मुख्य संदेश
विषय राष्ट्रपति का विचार
  • योग व आयुर्वेद स्वस्थ भविष्य की दिशा दिखाने वाली भारतीय ज्ञान परंपरा।
  • औषधि वनस्पति इनका संवर्धन और क्षेत्र विस्तार करना अनिवार्य है।
  • नागरिक स्वास्थ्य देश को सशक्त बनाने के लिए नागरिकों का स्वस्थ रहना पहली शर्त है।
  • अध्यात्म संत गजानन महाराज के दर्शन से मिली नई ऊर्जा।
  • यह दौरा इस बात का प्रतीक है कि भारत अपनी प्राचीन विरासत और आधुनिक विज्ञान के मेल से ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ के सपने को साकार करने की ओर अग्रसर है।

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