Dahisar: जब युवा शक्ति किसी सामाजिक संकल्प के साथ सड़कों पर उतरती है, तो बदलाव की आहट साफ सुनाई देने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा मुंबई के दहिसर में देखने को मिला, जहां पीएमके फाउंडेशन (PMK Foundation) और ठाकुर रामनारायण कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘कैंसर अवेयरनेस वॉकथॉन (2K26)’ ने सकारात्मकता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में कैंसर के प्रति व्याप्त भय को मिटाना और यह संदेश देना था कि सही समय पर पहचान और इच्छाशक्ति से इस बीमारी को हराया जा सकता है।
View this post on Instagram
500 युवाओं का जोश और ‘अजेय’ संदेश
वॉकथॉन की शुरुआत दहिसर से हुई, जिसमें 3 किलोमीटर की दूरी तय की गई। इस मुहिम में 500 से अधिक विद्यार्थियों, एनएसएस (NSS) वॉलंटियर्स और जागरूक नागरिकों ने हिस्सा लिया।
- नारे और तख्तियां: छात्रों के हाथों में “कैंसर लाइलाज नहीं है” और “जल्दी जांच, बेहतर इलाज” जैसे संदेशों वाली तख्तियां थीं, जो राहगीरों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत कर रही थीं।
- सामुदायिक भागीदारी: केवल छात्र ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों ने भी वॉकथॉन के मार्ग पर खड़े होकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
मुख्य अतिथि ADGP कृष्ण प्रकाश ने दिखाई हरी झंडी
इस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के अपर पुलिस महानिदेशक (ADGP) श्री कृष्ण प्रकाश मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपनी फिटनेस और ऊर्जा के लिए मशहूर कृष्ण प्रकाश ने वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं की इस पहल की सराहना की और कहा कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में ‘मानसिक मजबूती’ और ‘जागरूकता’ सबसे बड़े हथियार हैं।
‘कैंसर मुक्त भारत’ की ओर एक कदम
पीएमके फाउंडेशन की टीम और कॉलेज प्रशासन ने इस सफल आयोजन के जरिए यह साबित किया कि शैक्षणिक संस्थान केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक स्वास्थ्य और कल्याण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
- पीएमके फाउंडेशन का संकल्प: फाउंडेशन का लक्ष्य है कि कैंसर के लक्षणों और उपचार के बारे में जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
- कॉलेज की भूमिका: ठाकुर रामनारायण कॉलेज के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने छात्रों को इस सामाजिक सेवा के लिए प्रेरित कर उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में काम किया।
बदलाव की शुरुआत
दहिसर की सड़कों पर छात्रों द्वारा उठाए गए ये कदम आने वाले समय में एक स्वस्थ समाज की नींव रखेंगे। यह वॉकथॉन महज एक शारीरिक गतिविधि नहीं थी, बल्कि यह उन हजारों कैंसर योद्धाओं के प्रति एक सम्मान था जो हर दिन इस बीमारी से लड़ रहे हैं।
जब समाज जागरूक होता है, तब बीमारियां हारती हैं और जीवन जीतता है।”




























