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JDU की नई कार्यकारिणी घोषित: संजय झा बने कार्यकारी अध्यक्ष, नीतीश कुमार के बेटे को नहीं मिली कोई जिम्मेदारी

नीतीश कुमार
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जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की नई सूची जारी कर दी है, जिसमें संगठनात्मक ढांचे में कई अहम बदलाव किए गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे, जबकि वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा को एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल

नई सूची के अनुसार, पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से कई पदों पर नियुक्तियां की हैं। कुल 12 नेताओं को महासचिव बनाया गया है, जिनमें मनीष कुमार वर्मा, आफाक अहमद खान, श्याम रजक, अशोक चौधरी, रमेश सिंह कुशवाहा, रामसेवक सिंह, कहकशां प्रवीण, कपिल हरिश्चंद्र पाटील, राज सिंह मान, सुनील कुमार (इंजीनियर सुनील), हर्षवर्धन सिंह और मौलाना गुलाम रसूल बलियावी शामिल हैं।

सचिव और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी

राजीव रंजन प्रसाद को पार्टी का सचिव और प्रवक्ता बनाया गया है। इसके अलावा रविंद्र प्रसाद सिंह, विद्यासागर निषाद, दयाशंकर राय, संजय कुमार, मोहम्मद निसार, रूबी लागून और निवेदिता कुमारी को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के कोषाध्यक्ष के रूप में गोपालगंज से सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन को नियुक्त किया गया है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद में बदलाव

इस बार कार्यकारिणी में एक बड़ा बदलाव ये देखने को मिला कि पहले जहां तीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुआ करते थे, अब ये संख्या घटाकर एक कर दी गई है। जहानाबाद के पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

निशांत कुमार को नहीं मिली जगह

नई कार्यकारिणी की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को इसमें शामिल नहीं किया गया है। हाल ही में पार्टी में सक्रिय भूमिका की चर्चा के बावजूद उन्हें कोई पद नहीं दिया गया।

संभावित राजनीतिक संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, निशांत कुमार को कार्यकारिणी से बाहर रखना पार्टी के अंदर वंशवाद से दूरी बनाए रखने का संकेत माना जा रहा है। वहीं, कुछ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां देकर पार्टी आगामी चुनावों की तैयारी को मजबूत करने में जुटी नजर आ रही है।

JDU की नई कार्यकारिणी सूची से साफ है कि पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक संतुलन और अनुभव को प्राथमिकता दे रहा है। साथ ही, ये बदलाव आने वाले राजनीतिक समीकरणों और रणनीतियों की ओर भी इशारा करता है।

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