मुंबई में महिला आरक्षण को लेकर आयोजित भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा की रैली के दौरान एक विवाद सामने आया, जब ट्रैफिक जाम से परेशान एक महिला ने मंत्री गिरीश महाजन पर नाराजगी जताते हुए उन्हें ‘गेट आउट’ तक कह दिया। इस घटना के बाद अब मंत्री गिरीश महाजन ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है पूरा मामला?
मुंबई के वर्ली इलाके में आयोजित इस रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुई थीं। महिला आरक्षण को लेकर विरोध जताने के लिए निकाले गए इस मोर्चे के कारण इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। इसी दौरान जाम में फंसी एक महिला ने गुस्से में मंत्री के खिलाफ आपत्ति जताई और कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
मंत्री गिरीश महाजन की प्रतिक्रिया
घटना पर सफाई देते हुए मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि महिला को अपनी नाराजगी जाहिर करने का अधिकार है, लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया वो अनुचित था। उन्होंने बताया कि स्थिति को देखते हुए उन्होंने मौके पर ही माफी मांगी और लोगों को शांत रहने की अपील की।
‘महिला का गुस्सा समझ में आता है’
महाजन ने कहा कि ट्रैफिक में फंसे होने के कारण महिला की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी, लेकिन इस तरह की भाषा और व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि महिला ने पुलिस के साथ भी बदसलूकी की और पानी की बोतल फेंकी, हालांकि पुलिस ने संयम बनाए रखा।
रैली में उमड़ी भीड़ और ट्रैफिक पर असर
इस रैली में हजारों महिलाओं की भागीदारी के चलते यातायात प्रभावित हुआ। मंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर देशभर में महिलाओं में नाराजगी है, क्योंकि संबंधित बिल अब तक पारित नहीं हो सका है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतर रही हैं।
विपक्ष पर साधा निशाना
गिरीश महाजन ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को भी घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आत्ममंथन करना चाहिए कि उनके कार्यक्रमों में भीड़ क्यों नहीं जुटती, जबकि BJP के मोर्चों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
भविष्य के लिए क्या कहा
मंत्री ने स्वीकार किया कि इस तरह के बड़े आयोजनों में बेहतर प्रबंधन की जरूरत होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
मुंबई की इस घटना ने एक बार फिर ये दिखाया है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही, ये भी स्पष्ट हुआ कि जनभावनाओं को समझते हुए संवाद और संयम बनाए रखना सभी पक्षों के लिए जरूरी है।
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