मुंबई

9 मई 1874: जब मुंबई की सड़कों पर पहली बार दौड़ी घोड़ों वाली ट्राम, बदल गया शहर के परिवहन का इतिहास

ट्राम
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मुंबई आज देश की आर्थिक राजधानी और तेज रफ्तार जिंदगी के लिए जानी जाती है, लेकिन इस शहर के आधुनिक परिवहन की नींव आज से करीब 150 साल पहले रखी गई थी। 9 मई 1874 का दिन मुंबई के इतिहास में बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन शहर में पहली बार घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली ट्राम सेवा की शुरुआत हुई थी। ये सिर्फ एक नई परिवहन सेवा नहीं थी, बल्कि तेजी से बढ़ते बॉम्बे शहर के लिए एक बड़ी क्रांति साबित हुई थी।

बॉम्बे ट्रामवे कंपनी ने शुरू की थी सेवा
मुंबई में पहली ट्राम सेवा ‘बॉम्बे ट्रामवे कंपनी’ द्वारा शुरू की गई थी। उस समय शहर में बढ़ती आबादी और व्यापारिक गतिविधियों के कारण लोगों को एक बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत महसूस हो रही थी। इसी जरूरत को देखते हुए घोड़ों से चलने वाली ट्राम सेवा शुरू की गई।
कोलाबा से पैधोनी तक चला था पहला ट्राम रूट
मुंबई की पहली ट्राम कोलाबा (Colaba) से पैधोनी (Pydhonie) के बीच चलाई गई थी। उस दौर में ये सेवा लोगों के लिए बेहद आकर्षक और सुविधाजनक मानी जाती थी। ट्राम के जरिए लोग कम समय में शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक आसानी से पहुंच सकते थे।
33 साल तक सड़कों पर दौड़ी Horse Tram
घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली ट्राम लगभग 33 वर्षों तक मुंबई की पहचान बनी रही। ये सेवा न केवल आम लोगों के सफर को आसान बनाती थी, बल्कि शहर के व्यापार और विकास में भी अहम भूमिका निभाती थी। उस समय ट्राम मुंबई के सबसे भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन साधनों में से एक बन चुकी थी।
1907 में शुरू हुई इलेक्ट्रिक ट्राम सेवा
तकनीक के विकास के साथ मुंबई ने परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया। वर्ष 1907 में शहर में पहली इलेक्ट्रिक ट्राम सेवा शुरू की गई। इसके बाद धीरे-धीरे घोड़ों वाली ट्रामों की जगह इलेक्ट्रिक ट्राम ने ले ली। ये बदलाव मुंबई को आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने वाला ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ।
मुंबई के विकास में ट्राम की अहम भूमिका
मुंबई की ट्राम सेवा ने शहर के शहरी विकास, व्यापार और लोगों की दैनिक जिंदगी को काफी प्रभावित किया। यही कारण है कि ट्राम को मुंबई के परिवहन इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। आज भले ही मुंबई की सड़कों पर ट्राम दिखाई नहीं देती, लेकिन इसकी विरासत अब भी शहर के इतिहास में जीवित है।

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