मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 10.88 किमी लंबे SCLR कॉरिडोर के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से, बीकेसी-वाकोला आर्म का ढांचागत काम पूरा कर लिया है। अब यह पूरा नेटवर्क जल्द ही आम जनता के लिए पूरी तरह खुलने वाला है।
प्रमुख उपलब्धियां और इंजीनियरिंग की चुनौतियां
अंतिम कड़ी का जुड़ाव: वाकोला नाला के ऊपर 54 मीटर लंबे ‘ट्विन कॉम्पोजिट गर्डर्स’ को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। यह हिस्सा भारत डायमंड बोर्स (BKC) और वाकोला को जोड़ता है।
जटिल तकनीक: इस काम के लिए 700 और 500 मीट्रिक टन की भारी क्रेन का उपयोग किया गया। चूंकि यह इलाका काफी संकरा है और यहाँ ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है, इसलिए ‘फुल-स्पैन लॉन्चिंग’ तकनीक अपनाई गई।
डबल-लेवल संरचना: यह भारत के उन चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में से है जहाँ डबल-लेवल स्पैन का उपयोग किया गया है ताकि सीमित जगह में अधिक ट्रैफिक क्षमता दी जा सके।

आम जनता को क्या लाभ होगा?
1. सिग्नल-फ्री यात्रा: 11 किमी का यह पूरा रास्ता अब सिग्नल-फ्री होगा, जिससे ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे (EEH) और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे (WEH) के बीच की दूरी मिनटों में तय होगी।
2. इन इलाकों को मिलेगी राहत: सांताक्रूज़, वाकोला, कलीना, कुर्ला और चेंबूर के स्थानीय ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
3. BKC कनेक्टिविटी: मुंबई के सबसे बड़े बिजनेस हब (BKC) तक पहुंचना अब पूर्व और पश्चिम दोनों उपनगरों से आसान हो जाएगा।
प्रोजेक्ट के खास आंकड़े:
कुल लंबाई: 10.88 किमी (लगभग 11 किमी)।
बीकेसी-वाकोला आर्म: 1.4 किमी लंबा (500 मीटर 4-लेन और 900 मीटर 2-लेन कनेक्टर्स)।
गर्डर का वजन: करीब 358 मीट्रिक टन।
नेताओं और अधिकारियों के बयान (मुख्य अंश):
देवेंद्र फडणवीस (मुख्यमंत्री): “यह मुंबई में यातायात की भीड़ कम करने और तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।”
एकनाथ शिंदे (उपमुख्यमंत्री): “यह कॉरिडोर दैनिक यात्रियों के लिए जीवनरेखा साबित होगा और यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाएगा।”
डॉ. संजय मुखर्जी (महानगर आयुक्त, MMRDA): “यह केवल एक पुल नहीं, बल्कि पूरे मोबिलिटी नेटवर्क की पूर्णता है जो मुंबई की यात्रा को सुगम बनाएगा।”
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