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कोटा हॉस्पिटल में 5 माताओं की मौत! नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में निकला सिर्फ पानी

कोटा हॉस्पीटल
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राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी (सिजेरियन) के बाद 5 महिलाओं की मौत का मामला अब पूरी तरह उजागर हो गया है। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि इन महिलाओं को दिया गया ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पूरी तरह नकली था। इंजेक्शन में सक्रिय दवा की जगह सिर्फ पानी भरा हुआ पाया गया, जिसके कारण प्रसवोत्तर रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) को नियंत्रित नहीं किया जा सका और महिलाओं की हालत तेजी से बिगड़ गई।

घटना क्या थी?

कोटा के न्यू मेडिकल अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी कराने आईं 5 महिलाओं की डिलीवरी के बाद भारी रक्तस्राव शुरू हुआ। डॉक्टरों ने रक्तस्राव रोकने के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाया, जो प्रसव के बाद गर्भाशय को सिकुड़ने और खून बहना रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा है।

लेकिन इंजेक्शन काम नहीं किया। महिलाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और दुर्भाग्यवश पांचों प्रसूताओं की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

जांच रिपोर्ट का बड़ा खुलासा

  • अस्पताल में इस्तेमाल किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल लैबोरेटरी भेजे गए।
  • रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि इंजेक्शन मानकों के अनुरूप नहीं थे।
  • उनमें ऑक्सीटोसिन की सक्रिय मात्रा शून्य (जीरो) थी, यानी दवा की जगह केवल पानी भरा था।
  • इससे महिलाओं को कोई चिकित्सीय लाभ नहीं मिल सका और पोस्टपार्टम ब्लीडिंग अनियंत्रित हो गई।

ये खुलासा उन आशंकाओं की पुष्टि करता है जो घटना के तुरंत बाद जताई जा रही थीं।

ऑक्सीटोसिन क्यों महत्वपूर्ण है?

ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन आधारित दवा है जो:

  • प्रसव के दौरान गर्भाशय के संकुचन में मदद करती है।
  • डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव को रोकती है।
  • मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यदि ये दवा नकली या घटिया गुणवत्ता की हो तो प्रसूता की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

मामला और क्या कहता है?

  • कंपनी पर कार्रवाई: संबंधित बैच (जिसमें ‘टोसिन’ ब्रांड का जिक्र है) को राजस्थान भर में प्रतिबंधित कर दिया गया है। हजारों इंजेक्शन जब्त किए जा चुके हैं।
  • स्वास्थ्य विभाग की भूमिका: दवा आपूर्ति और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
  • सरकारी प्रतिक्रिया: पहले जांच रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की बात कही गई थी, लेकिन अब रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सामने आ गई है।

मातृ स्वास्थ्य के लिए सबक

ये घटना सरकारी अस्पतालों में दवा आपूर्ति, स्टोरेज और गुणवत्ता जांच की मजबूत व्यवस्था की जरूरत को रेखांकित करती है। नकली दवाओं का मरीजों की जान पर सीधा असर पड़ता है, खासकर प्रसूताओं और नवजात शिशुओं जैसे संवेदनशील समूह पर।

कोटा की यह त्रासदी केवल 5 परिवारों की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की चूक है। उम्मीद है कि इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए। माताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी सभ्य समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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