India-UK CETA लागू: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) अब लागू हो चुका है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर ब्रिटेन से आने वाली कारें, प्रीमियम कॉस्मेटिक्स, वेलनेस प्रोडक्ट्स, घड़ियां और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के भारतीय बाजार में अधिक उपलब्ध होने की संभावना है।
हालांकि, इस समझौते के लागू होने के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों को फिलहाल इन उत्पादों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। इसके पीछे रुपये की कमजोरी, बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और वैश्विक परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं।
क्या है India-UK CETA?
भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ CETA दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस समझौते के तहत कई उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Duty) में चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी, जिससे भविष्य में व्यापार बढ़ेगा और विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और भारतीय उद्योगों को भी ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी।
फिर तुरंत सस्ते क्यों नहीं होंगे सामान?
हालांकि आयात शुल्क में राहत मिली है, लेकिन कई अन्य आर्थिक कारण फिलहाल कीमतों को कम होने से रोक रहे हैं।
1. रुपये की कमजोरी
पिछले एक वर्ष में भारतीय रुपया ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इसका सीधा असर आयातित सामान की लागत पर पड़ा है। कंपनियों का कहना है कि मुद्रा विनिमय में हुए नुकसान की भरपाई केवल टैक्स में मिली छूट से संभव नहीं है।
2. बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है। कई कंपनियों को अब सामान हवाई मार्ग से मंगाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत काफी बढ़ गई है।
3. टैक्स में राहत चरणबद्ध मिलेगी
विशेषज्ञों के अनुसार CETA के तहत सभी उत्पादों पर एक साथ शुल्क समाप्त नहीं होगा। कई श्रेणियों में आयात शुल्क धीरे-धीरे कम होगा, इसलिए उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ मिलने में कुछ समय लग सकता है।
किन उत्पादों पर दिख सकता है असर?
व्यापार समझौते के बाद कई ब्रिटिश कंपनियां भारतीय बाजार में अपने उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं।
इनमें प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं:
- प्रीमियम कॉस्मेटिक्स
- स्किनकेयर और वेलनेस उत्पाद
- लग्जरी घड़ियां
- ऑटोमोबाइल
- लाइफस्टाइल और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारतीय ग्राहकों को पहले से अधिक ब्रिटिश ब्रांड उपलब्ध होंगे।
कुछ कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला टाला
ब्रिटिश कॉस्मेटिक ब्रांड Lush ने फिलहाल भारत में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का निर्णय टाल दिया है।
कंपनी के भारतीय साझेदारों के अनुसार जिन उत्पादों पर आयात शुल्क में अधिक राहत मिली है, वहां ग्राहकों को कुछ मूल्य लाभ देने की कोशिश की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से शॉवर जेल, साबुन और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। हालांकि सभी उत्पादों की कीमतें कम करना फिलहाल संभव नहीं माना जा रहा है।
भारत में बढ़ेगी विदेशी ब्रांड्स की मौजूदगी
वेलनेस और स्किनकेयर सेक्टर की कई ब्रिटिश कंपनियां अब भारत में प्रवेश की तैयारी कर रही हैं। उद्योग जगत के अनुसार अगले 6 से 9 महीनों में कई नए ब्रिटिश ब्रांड भारतीय बाजार में लॉन्च हो सकते हैं। इनकी कीमतें मुख्य रूप से 700 रुपये से 1,500 रुपये के बीच रहने की संभावना है।
इसी तरह प्रीमियम घड़ी निर्माता और अन्य लाइफस्टाइल ब्रांड भी भारत में निवेश बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं।
भारत को क्या होगा फायदा?
India-UK CETA से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
- भारतीय बाजार में अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की उपलब्धता बढ़ेगी।
- विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
- व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे।
- भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
- दीर्घकाल में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है।
भारत-यूके CETA व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि ग्राहकों को अभी विदेशी उत्पादों की कीमतों में तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है, लेकिन आने वाले वर्षों में आयात शुल्क में क्रमिक कमी, नए ब्रिटिश ब्रांडों की एंट्री और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का लाभ निश्चित रूप से भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं को मिल सकता है। ये समझौता भारत को वैश्विक व्यापार नेटवर्क में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हो सकता है।




















