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Anil Ambani को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका: बैंक ऑफ बड़ौदा धोखाधड़ी मामले में राहत से इनकार, अदालत ने कहा- ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले का करें इंतजार’

Anil Ambani
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मुंबई: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) से जुड़े एक कथित धोखाधड़ी मामले में उन्हें किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने अंबानी की याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि जब मामला पहले से ही देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में लंबित है, तो उन्हें वहीं के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘अलग-अलग रास्ते अपनाने के बजाय याचिका वापस लें’
न्यायमूर्ति की खंडपीठ के समक्ष हुई इस सुनवाई में अदालत का रुख काफी सख्त रहा। बैंक की दलीलों से सहमति जताते हुए पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता (अनिल अंबानी) को कई अलग-अलग कानूनी रास्ते तलाशने के बजाय अपनी याचिका वापस ले लेनी चाहिए थी।

अदालत ने कहा कि चूंकि इसी तरह के मुद्दे और जांच पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं, इसलिए समानांतर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।

वकीलों के बीच तीखी बहस: ऑडिट रिपोर्ट बना मुद्दा
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार दलीलें पेश की गईं:
* अनिल अंबानी के वकील का तर्क: बचाव पक्ष ने दलील दी कि बैंक ऑफ बड़ौदा को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें उस ऑडिट रिपोर्ट या उससे संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच नहीं दी गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

* बैंक ऑफ बड़ौदा का विरोध: बैंक की ओर से पेश वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अनिल अंबानी (Anil Ambani) ने अलग-अलग बैंकों के खिलाफ कई याचिकाएं दायर कर रखी हैं। इसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी जांच एजेंसियां भी शामिल हैं। बैंक ने तर्क दिया कि यह मामला नया नहीं है और इसी तरह के मुद्दे पहले भी उठाए जा चुके हैं।

क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी लड़ाई बैंकों द्वारा अनिल अंबानी से जुड़ी कुछ कंपनियों के खातों को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने और उसके बाद शुरू हुई जांच से संबंधित है। बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य बैंकों ने एसबीआई की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू की थी, जिसे अंबानी ने चुनौती दी है।

केस के मुख्य बिंदु
पक्ष मुख्य दलील / स्थिति
अनिल अंबानी (Anil Ambani) ऑडिट रिपोर्ट तक पहुंच न मिलना और प्रक्रियात्मक खामियों का दावा।
बैंक ऑफ बड़ौदा | कई अदालतों में याचिकाएं दायर कर मामले को उलझाने का आरोप।
बॉम्बे हाई कोर्ट अंतरिम राहत देने से इनकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भरता।
जांच एजेंसियां सीबीआई समेत अन्य एजेंसियां मामले की वित्तीय अनियमितताओं की जांच में शामिल।

अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी निगाहें
बॉम्बे हाई कोर्ट के इस रुख के बाद अब अनिल अंबानी (Anil Ambani) के पास सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सर्वोच्च अदालत से उन्हें राहत नहीं मिलती है, तो बैंकों और सीबीआई की कार्रवाई का शिकंजा उन पर और कस सकता है।

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