Women Power Growth: भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और अब वे बिजनेस की दुनिया में मजबूत पहचान बना रही हैं। हाल के वर्षों में ये बदलाव साफ तौर पर देखने को मिला है, जहां महिलाएं छोटे स्तर से लेकर बड़े कारोबार तक में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 तक भारत में महिलाओं द्वारा लिया गया कुल कर्ज बढ़कर करीब 76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था में उनके बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
ये रिपोर्ट TransUnion CIBIL, नीति आयोग और MicroSave Consulting द्वारा तैयार की गई है। इसमें बताया गया है कि महिलाओं का ये लोन देश के कुल क्रेडिट का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा है। खास बात ये है कि 2017 की तुलना में ये आंकड़ा करीब 4.8 गुना बढ़ चुका है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
बढ़ रही है महिलाओं की वित्तीय पहुंच
देश में इस समय लगभग 16 करोड़ महिलाएं सक्रिय रूप से लोन ले रही हैं, जिससे कुल क्रेडिट पहुंच में उनकी हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि ये आंकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसी हैं जो औपचारिक बैंकिंग और क्रेडिट सिस्टम से बाहर हैं। अनुमान के मुताबिक, 18 से 64 वर्ष की लगभग दो-तिहाई महिलाएं अभी भी लोन सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही हैं।
डिजिटल क्रांति से मिला बड़ा सहारा
महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी के पीछे डिजिटल सुविधाओं का बड़ा योगदान है। अब पहचान, भुगतान और लोन आवेदन जैसी प्रक्रियाएं पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई हैं। मोबाइल और इंटरनेट के जरिए महिलाएं घर बैठे लोन के लिए आवेदन कर रही हैं और वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा रही हैं।
पहले जहां महिलाएं अनौपचारिक स्रोतों से उधार लेने पर निर्भर थीं, वहीं अब वे बैंक और वित्तीय संस्थानों से सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से लोन ले रही हैं। इससे उनके बिजनेस को विस्तार देने में मदद मिल रही है और आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है।
बिजनेस लोन में तेजी से बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, महिला उद्यमियों द्वारा लिए जाने वाले बिजनेस लोन में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। 2017 के बाद से उनके लोन पोर्टफोलियो में लगभग 7.5 गुना बढ़ोतरी हुई है। ये इस बात का संकेत है कि महिलाएं अब नौकरी के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करने की ओर अधिक ध्यान दे रही हैं।
शुरुआत में महिलाएं छोटे लोन से अपने काम की शुरुआत करती हैं, लेकिन समय के साथ वे बड़े निवेश और विस्तार की ओर भी कदम बढ़ा रही हैं। ये उनके बढ़ते आत्मविश्वास और वित्तीय समझ को दर्शाता है।
आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदम
रिपोर्ट में ये भी सुझाव दिया गया है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। उनकी वित्तीय पहचान को मजबूत करना, क्रेडिट हिस्ट्री को बेहतर बनाना और छोटे से बड़े लोन तक पहुंच को आसान बनाना जरूरी है।
इसके अलावा, युवा महिलाओं, खासकर 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं तैयार करना भी अहम है, ताकि वे जल्दी व्यवसाय शुरू कर सकें। साथ ही, डिजिटल फाइनेंस और बचत से जुड़ी जानकारी देना भी उनकी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत में महिलाएं अब सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बढ़ता लोन, बढ़ती भागीदारी और डिजिटल सहयोग ये दिखाता है कि आने वाले समय में महिला उद्यमिता और भी मजबूत होने वाली है।
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