Asian Games 2026 में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय कंपाउंड तीरंदाज चिकिथा तनिपर्थी की सफलता के पीछे उनके परिवार के संघर्ष की कहानी भी सामने आई है। तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव की रहने वाली चिकिथा ने महिला कंपाउंड टीम और मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता। मिक्स्ड टीम में साहिल जाधव के साथ उनकी जीत ने भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए कंपाउंड मिक्स्ड टीम का कोटा भी दिलाया।
किसान पिता ने बेटी के सपने के लिए उठाया जोखिम
चिकिथा के पिता श्रीनिवास राव किसान हैं और परिवार खेती पर निर्भर है। बेटी की तीरंदाजी में रुचि बढ़ी तो उन्होंने अपनी सीमित आर्थिक क्षमता के बावजूद उसके ट्रेनिंग और इक्यूपमेंट का खर्च उठाया। परिवार ने कर्ज लिया और यहां तक कि चावल की कटाई के लिए इस्तेमाल होने वाली हार्वेस्टर मशीन भी बेचनी पड़ी।
शुरुआत में चिकिथा ने स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग लिया। परिवार को अच्छे इक्यूपमेंट खरीदने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके पिता के मुताबिक, पहला कंपाउंड धनुष खरीदने की कोशिश में परिवार को करीब 1.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इसके बाद उन्होंने करीब 3.5 लाख रुपये का कर्ज लेकर नया धनुष खरीदा। बाद में चिकिथा के प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन की मदद से उन्हें सरकारी फंड से नया इक्यूपमेंट भी मिला।
गांव में ही करती थीं अभ्यास
संसाधनों की कमी के बावजूद चिकिथा की ट्रेनिंग नहीं रुकी। उनके पिता उन्हें पास के शहर में ट्रेनिंग के लिए ले जाते थे। घर के पास खाली जगह में कार्डबोर्ड और कपड़े से बने अस्थायी टारगेट लगाकर भी वो प्रैक्टिस करती थीं।
बाद में परिवार चिकिथा को दिल्ली लेकर गया, जहां उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज अभिषेक वर्मा से हुई। उनकी मदद और मार्गदर्शन के बाद चिकिथा का चयन सोनीपत स्थित SAI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए हुआ। यहीं से उनके खेल करियर को आगे बढ़ने का बड़ा मंच मिला।
पहली ही एशियन गेम्स में दो गोल्ड
21 वर्षीय चिकिथा ने अपने एशियन गेम्स डेब्यू में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ज्योति सुरेखा वेन्नम और पृथिका प्रदीप के साथ महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद साहिल जाधव के साथ मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भी गोल्ड हासिल किया। इस मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को शूट-ऑफ में हराया और ओलंपिक कोटा हासिल किया।
गौरतलब है कि महिला टीम की जीत में भारत ने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी टीम की इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी।
बेटी का मुकाबला टीवी पर नहीं देख पाए पिता
चिकिथा के पिता अपनी बेटी के ऐतिहासिक मुकाबले को लाइव नहीं देख सके। रिपोर्ट के मुताबिक, वो उस समय अपने खेत में काम कर रहे थे। परिवार के पास लंबे समय तक टीवी और स्मार्टफोन जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं। इसके बावजूद श्रीनिवास ने बेटी के प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी।
आज उनकी बेटी दो गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। वहीं, परिवार के लिए ये सफर सिर्फ पदक तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच बेटी के खेल के सपने को पूरा करने की कोशिश की कहानी भी है।
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