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एशिया की सबसे बड़ी मंडी में ‘सेस’ का महाघोटाला? APMC में 20 साल से नहीं हुई खातों की जांच, करोड़ों के राजस्व पर फिर रहा पानी

नवी मुंबई
नवी मुंबई

नवी मुंबई: मुंबई कृषि उत्पन्न बाजार समिति (APMC), जो एशिया की सबसे महत्वपूर्ण मंडियों में से एक मानी जाती है, इस वक्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के घेरे में है। एक चौंकाने वाले खुलासे के अनुसार, मंडी के सब्जी और फल मार्केट में पिछले दो दशकों से व्यापारियों के खातों (दफ्तरों) की कोई आधिकारिक जांच नहीं की गई है। इस लंबी खामोशी ने अब एक बड़े ‘सेस घोटाले’ की आशंका को जन्म दे दिया है।

20 साल की चुप्पी: प्रशासनिक सांठगांठ या गहरी साजिश?
नियमों के अनुसार, बाजार समिति को समय-समय पर व्यापारियों के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, आवक-जावक रजिस्टर और सेस (बाजार शुल्क) भुगतान का सत्यापन करना अनिवार्य है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि पिछले 20 वर्षों से इस प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

  • मिलीभगत के आरोप: चर्चा है कि कुछ स्थानीय संचालकों और रसूखदार प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण यह जांच प्रक्रिया जानबूझकर टाली जाती रही।
  • राजस्व को चपत: सेस (Cess) ही बाजार समिति की आय का मुख्य स्रोत है। यदि खरीद-बिक्री के आंकड़ों में हेरफेर किया गया है, तो इसका सीधा अर्थ है कि बाजार समिति को मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी की गई है।

क्या छिपाया जा रहा है? जांच के दायरे में आने वाले दस्तावेज
व्यापारी और किसान संगठनों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जांच के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है:

  • आवक-जावक रजिस्टर: मंडी में आने वाले ट्रकों और माल की वास्तविक मात्रा।
  • तौल पर्चियां और बिल बुक: क्या किसानों को दिया गया भाव और रिकॉर्ड में दर्ज भाव समान है?
  • सेस भुगतान रसीदें: क्या बेचे गए माल के अनुपात में बाजार शुल्क का भुगतान किया गया है?

अधिकारियों की चुप्पी और सरकार से उम्मीद
इस गंभीर मामले पर जब बाजार समिति के सचिव शरद जरे से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने बैठक में व्यस्त होने का हवाला देकर फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है।

अब इस मामले में सबकी निगाहें राज्य के विपणन मंत्री, विपणन संचालक और विपणन सचिव पर टिकी हैं। किसान संगठनों ने मांग की है कि:

  • एक स्वतंत्र उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए।
  • पिछले 20 वर्षों के रिकॉर्ड का ऑडिट किसी बाहरी एजेंसी से कराया जाए।
  • दोषी अधिकारियों और व्यापारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

बाजार समिति का गणित
APMC में रोजाना हजारों टन सब्जी और फल आते हैं। यदि 1% सेस की भी हेराफेरी होती है, तो 20 साल में यह आंकड़ा कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह मामला न केवल राजस्व की हानि का है, बल्कि उन हजारों किसानों के भरोसे का भी है जो अपनी मेहनत की फसल लेकर इस मंडी में आते हैं।

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