राष्ट्रीय उपलब्धियाँ, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा और यात्री सेवा में ‘उत्कृष्टता’ का नया मानक
वर्ष 2025 पश्चिम रेलवे (Western Railway) के इतिहास में एक ‘परिवर्तनकारी मील का पत्थर’ बनकर उभरा है। इस वर्ष न केवल परिचालन के नए कीर्तिमान स्थापित हुए, बल्कि भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के विजन को धरातल पर उतारने में पश्चिम रेलवे ने अग्रणी भूमिका निभाई। 100% विद्युतीकरण से लेकर स्वदेशी लोको निर्माण तक, यह वर्ष विकास और अनुशासन के अनूठे संगम का साक्षी रहा।
1. राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिक मील के पत्थर
वर्ष 2025 की सबसे बड़ी गौरवगाथा ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण रही। इसके साथ ही पश्चिम रेलवे अब पूर्णतः हरित और ऊर्जा-कुशल रेल क्षेत्र बन गया है।
दाहोद लोको मैन्युफैक्चरिंग शॉप: प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप ₹21,405 करोड़ की लागत से निर्मित इस संयंत्र का लोकार्पण किया गया। यहाँ 9000 HP के शक्तिशाली विद्युत इंजनों का निर्माण शुरू हुआ, जो “मेक इन इंडिया” के तहत न केवल भारत बल्कि विश्व (स्टैंडर्ड गेज लोको) के लिए भी इंजनों की आपूर्ति करेगा।
मिशन रफ्तार: रतलाम मंडल में भारत की पहली 2×25 केवी ट्रैक्शन प्रणाली शुरू की गई, जिसने हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए भविष्य की राह खोल दी है।
2. बुनियादी ढांचा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
पश्चिम रेलवे ने इस वर्ष 234 किलोमीटर की नई लाइनें, दोहरीकरण और गेज परिवर्तन के कार्य पूरे किए।
प्रमुख परियोजनाएं: आनंद-गोधरा (79 किमी): ₹693 करोड़ की लागत से दोहरीकरण पूर्ण।
महेसाणा-पालनपुर (65.10 किमी): दिल्ली-अहमदाबाद राजधानी मार्ग की अंतिम बाधा दूर हुई।
साबरमती-बोटाद: इस खंड के विद्युतीकरण के साथ गुजरात का रेल नेटवर्क पूरी तरह ‘इलेक्ट्रिफाइड’ हो गया।
संरक्षा प्रथम: संरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए 138 आरओबी/आरयूबी का निर्माण किया गया और 114 मानवयुक्त फाटकों को हटाकर ‘मिशन जीरो एक्सीडेंट’ की दिशा में कदम बढ़ाए गए।
3. परिचालन उत्कृष्टता और समयपालन (Punctuality)
समय की पाबंदी में पश्चिम रेलवे ने पूरे भारतीय रेल में अपना दबदबा बनाए रखा।
97% समयपालनता: नवंबर 2025 में दर्ज की गई यह दर भारतीय रेल के सभी ज़ोन में सर्वश्रेष्ठ रही।
चुनौतियों पर विजय: भारी मानसून और मुंबई की सघन उपनगरीय भीड़ के बावजूद, पश्चिम रेलवे ने ट्रेनों का संचालन सुचारू रखा।
4. यात्री सेवा और डिजिटल नवाचार
डिजिटल इंडिया के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम रेलवे ने ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ को अपनाया।
SUGAMRAIL: लिफ्ट और एस्केलेटर की रियल-टाइम निगरानी के लिए भारत का पहला सॉफ्टवेयर लॉन्च किया गया।
अमृत भारत एक्सप्रेस: उधना और ब्रह्मपुर के बीच गुजरात की पहली अमृत भारत ट्रेन की शुरुआत हुई।
डिजिटल टिकटिंग: 2,270 हैंड-हेल्ड टर्मिनलों के साथ टिकट चेकिंग को 100% डिजिटल बनाया गया।
मुंबई की जीवनरेखा: प्रतिदिन 30 लाख यात्रियों को ढोने वाले मुंबई लोकल नेटवर्क ने मानसून के दौरान भी निर्बाध सेवा प्रदान की।
5. सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार
ऑपरेशन जीवन रक्षा: आरपीएफ कर्मियों ने अपनी तत्परता से 37 लोगों की जान बचाई।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते: 769 लापता बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया गया।
चिकित्सा में कीर्तिमान: जगजीवन राम अस्पताल, मुंबई में रेलवे का पहला ‘अवे क्रैनियोटोमी’ (Awake Craniotomy) सफल ऑपरेशन किया गया। साथ ही, राजकोट अस्पताल को NABL मान्यता मिली।
6. विरासत और खेल: गौरव के नए क्षितिज
पश्चिम रेलवे ने अपनी विरासत को संजोते हुए भविष्य की प्रतिभाओं को भी निखारा।
विरासत संरक्षण: बांद्रा स्टेशन महोत्सव और रतलाम स्टेशन के शताब्दी वर्ष ने रेलवे की ऐतिहासिक भव्यता को जनता के बीच जीवंत किया।
खेल जगत: सुश्री अंतिम पंघल (कुश्ती) और सुश्री सोनाली शिंगटे (कबड्डी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर देश और रेलवे का नाम रोशन किया।
अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार: पश्चिम रेलवे ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 7 शील्ड जीतकर अपनी कार्यकुशलता को प्रमाणित किया।
वर्ष 2025 पश्चिम रेलवे के लिए केवल आँकड़ों का वर्ष नहीं, बल्कि अटूट प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय सेवा का वर्ष रहा। 100% विद्युतीकरण, अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और ‘यात्री-प्रथम’ की नीति ने इसे भारतीय रेलवे का एक आदर्श मॉडल बना दिया है।































