फर्जी बीमा पॉलिसी: नोएडा में एक फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया है जहां 9 लड़कियां और दो पूर्व बीमा एजेंट लोगों को धोखा देकर फर्जी बीमा पॉलिसी बेचते थे।
कैसे हुआ खुलासा? पुलिस ने एक इमारत के चौथी मंजिल पर चल रहे इस कॉल सेंटर पर छापा मारा और 11 लोगों को गिरफ्तार किया। ये लोग नकली आधार कार्ड के जरिए सिम कार्ड खरीदते थे ताकि अपनी पहचान छुपा सकें।
कैसे करते थे धोखाधड़ी?
- डेटा खरीदना: आशीष और जितेंद्र नाम के ये दो मुख्य आरोपी पहले एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस में काम करते थे। उन्होंने नौकरी छोड़ने के बाद इंडियामार्ट से 2,500 रुपये में लगभग 10,000 लोगों का डेटा खरीदा।
- कॉल करना: 9 महिलाएं कॉल सेंटर में एग्जीक्यूटिव बनकर लोगों को लोन और बीमा पॉलिसी के झूठे वादे करके फंसाती थीं।
- झूठे वादे: ये लोग ज्यादा रिटर्न और आकर्षक बीमा पॉलिसी का झांसा देकर लोगों को फंसाते थे। जितने ज्यादा लोग फंसते, उतनी ही उनकी कमाई होती।
- पैसे निकालना: लोगों से ठगे गए पैसे कर्नाटक के अरविंद नाम के एक शख्स के बैंक खाते में जमा किए जाते थे। अरविंद को खाता किराए पर देने के लिए हर महीने 10,000 रुपये मिलते थे। फिर आशीष और जितेंद्र नोएडा में डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करके पैसे निकाल लेते थे।
पुलिस को क्या मिला? पुलिस को आशीष के पास से एक काली डायरी मिली जिसमें हर लेन-देन का ब्योरा था। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि इस गिरोह के खिलाफ रांची में भी इसी तरह के एक मामले में केस दर्ज है।
न्यायिक कार्रवाई: आशीष कुमार उर्फ अमित और जितेंद्र वर्मा उर्फ अभिषेक को मुख्य आरोपी के रूप में पहचाना गया है। सभी गिरफ्तार लोगों के खिलाफ नई भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।




























