मायानगरी मुंबई के गुरुद्वारे इन दिनों आध्यात्मिक आभा से सराबोर हैं। सिख धर्म के नौवें गुरु, हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 404वां प्रकाश पूरब मंगलवार, 7 अप्रैल को पूरे श्रद्धा भाव और विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में सिख पंथ के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जुन देव साहिब जी की 463वीं जयंती और आगामी बैसाखी (खालसा साजना दिवस) को लेकर संगत में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
दो महान गुरुओं का जन्मोत्सव: एक अनूठा संयोग
सिख इतिहास में वैशाख का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस वर्ष तिथियों के अनुसार दोनों महान गुरुओं का प्रकाश पूरब महज दो दिनों के अंतराल पर आ रहा है:
* गुरु तेग बहादुर साहिब जी: इनका जन्म वैशाख कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि (21 अप्रैल 1621) को हुआ था। इस वर्ष मंगलवार को उनका 404वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।
* गुरु अर्जुन देव साहिब जी: इनका जन्म वैशाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि (15 अप्रैल 1563) को हुआ था। इस वर्ष उनकी 463वीं जयंती का उल्लास भी संगत के बीच देखते ही बन रहा है।
इन दोनों गुरुओं के बलिदान और शिक्षाओं को याद करते हुए मुंबई के सभी छोटे-बड़े गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजाए गए हैं।
7 से 14 अप्रैल: भक्ति और कीर्तन का विशेष सप्ताह
मंगलवार से लेकर अगले एक सप्ताह तक मुंबई के गुरुद्वारों में आध्यात्मिक कार्यक्रमों की झड़ी लगी रहेगी। 14 अप्रैल को मनाए जाने वाले बैसाखी (खालसा साजना दिवस) तक चलने वाले इस महोत्सव की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:
* अखंड पाठ साहिब: गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पूरब के अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के विशेष पाठ का आयोजन किया जा रहा है।
* भजन-कीर्तन एवं प्रवचन: ख्याति प्राप्त रागी जत्थे गुरुवाणी के कीर्तन द्वारा संगत को निहाल करेंगे और कथावाचक गुरु साहिबान के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालेंगे।
* नगर कीर्तन और प्रभात फेरी: बैसाखी से तीन दिन पूर्व ही शहर के विभिन्न कोनों में ‘नगर कीर्तन’ और ‘प्रभात फेरी’ का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पंज प्यारों की अगुवाई में निकलने वाली इन फेरियों में गतका दल और श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग लेंगे।
खालसा साजना दिवस (बैसाखी) की तैयारी
14 अप्रैल का दिन सिख समाज के लिए शौर्य और संकल्प का प्रतीक है। इसी दिन दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी ने ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी। इस वर्ष बैसाखी के उपलक्ष्य में मुंबई में विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठानों की योजना बनाई गई है। लंगर की विशेष व्यवस्था की गई है, जहाँ ऊंच-नीच के भेदभाव को भुलाकर हजारों लोग एक साथ पंगत में प्रसाद ग्रहण करेंगे।
मुंबई के प्रमुख गुरुद्वारों में विशेष रौनक
दादर, खार, अंधेरी और नवी मुंबई के प्रमुख गुरुद्वारों में रोशनी और फूलों की सजावट की गई है। गुरुद्वारा कमेटियों के अनुसार, प्रकाश पूरब और बैसाखी के संगम से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिसके लिए सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
भय काहू को देत नहि, नहि भय मानत आन” — गुरु तेग बहादुर साहिब जी की इन अमर शिक्षाओं के साथ मुंबई की संगत मानवता और शांति का संदेश फैला रही है।
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