शिवसेना (UBT) के नेता अनिल देसाई के निजी सहायक (PA) दिनेश बोभाटे के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई CBI द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले के आधार पर की गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) आर्थिक अपराधों की जाँच करने वाली केंद्रीय एजेंसी है। ED, Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जाँच करता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिवसेना (UBT) के नेता अनिल देसाई के निजी सहायक (PA) दिनेश बोभाटे के खिलाफ़ PMLA के तहत ECIR दर्ज की है। ED ने यह कार्रवाई CBI द्वारा पिछले महीने दर्ज किए गए भ्रष्टाचार के एक मामले के आधार पर की है।
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CBI ने पिछले महीने बोभाटे और उनकी पत्नी के खिलाफ़ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया था। CBI के अनुसार 2014 से 2023 के बीच, जब बोभाटे न्यू इंडिया एश्योरेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड में असिस्टेंट के पद पर काम कर रहे थे, उन्होंने और उनकी पत्नी ने अवैध तरीकों से 2.58 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की थी।
CBI को अपनी जाँच में बोभाटे के बैंक खातों में कई वित्तीय अनियमितताएँ मिली हैं। बोभाटे और उनकी पत्नी के नाम पर कई फिक्स्ड डिपॉज़िट, म्यूचुअल फंड में निवेश, और कई तरह के अज्ञात स्रोतों से प्राप्त धनराशि जमा की गई थी। CBI ने जाँच में कई संदिग्ध लेनदेन और चल और अचल संपत्तियों का भी पता लगाया था।
बोभाटे के खिलाफ़ ED का केस अनिल देसाई के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। रवींद्र वायकर, वैभव नाइक, अनिल परब और राजन साल्वी के बाद, उद्धव ठाकरे गुट के एक और नेता अब जाँच एजेंसी की नज़र में आ गया है।
ED द्वारा आगे की जाँच से पता चलेगा कि क्या बोभाटे ने मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए अवैध संपत्ति अर्जित की है। इस मामले के आने वाले समय में कई नए खुलासे होने की संभावना है।































