देश-विदेश

बिहार में बाढ़ का कहर: 14 जिलों में 35.89 लाख लोग प्रभावित, सैकड़ों ट्रैक्टर पानी में डूबे

बिहार
Image Source - Web

बिहार में बाढ़ का कहर: बिहार में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है, जबकि निचले इलाकों में पानी भरने से लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि, कोसी और सोन नदी के जलस्राव में कमी तथा गंडक नदी के जलस्राव के स्थिर होने से प्रशासन को कुछ राहत की उम्मीद जगी है।

राज्य के 14 जिलों के 82 प्रखंडों और 491 ग्राम पंचायतों में करीब 35.89 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।

पटना में सैकड़ों नए ट्रैक्टर पानी में डूबे

पटना और आसपास के इलाकों में गंगा और पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर का असर बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। दीदारगंज इलाके में एक ट्रैक्टर शोरूम के यार्ड और वेयरहाउस में बाढ़ का पानी घुस गया। पानी भरने से यार्ड में खड़े सैकड़ों नए ट्रैक्टर जलमग्न हो गए।

पानी तेजी से बढ़ने के बाद कर्मचारियों ने परिसर को बंद किया और सुरक्षित स्थान की ओर निकल गए। इस घटना से कारोबार को भी भारी नुकसान होने की आशंका है।

कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर

राज्य में गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी प्रमुख नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जलस्तर में उतार-चढ़ाव पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।

जलस्राव में कमी के बावजूद निचले इलाकों में जमा पानी और तेज बहाव के कारण लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

456 सामुदायिक रसोई से लाखों लोगों को भोजन

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 456 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 10 लाख से अधिक लोगों को सुबह और शाम भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।

इसके अलावा 14 राहत शिविरों में 12 हजार से अधिक लोगों के रहने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में बच्चों के लिए दूध और महिलाओं के लिए सैनिटरी किट जैसी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

1,876 नावें और NDRF-SDRF की टीमें तैनात

बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत कार्यों के लिए 1,876 नावों का परिचालन किया जा रहा है। प्रशासन ने अब तक 1.20 लाख से अधिक पॉलिथीन शीट और 22,900 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए हैं।

मवेशियों के लिए 4,650 क्विंटल से अधिक पशुचारा भी उपलब्ध कराया गया है। त्वरित बचाव अभियान के लिए विभिन्न जिलों में SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें तैनात हैं। प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप और बोट एंबुलेंस के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

दानापुर और मनेर में डूबने से 5 लोगों की मौत

पटना जिले के दानापुर और मनेर क्षेत्र में बाढ़ के पानी में डूबने से 5 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। दानापुर के अनुमंडल पदाधिकारी ने मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों के परिजनों को सरकार की ओर से निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा।

ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन के एप्रोच रोड को नुकसान

गंगा के बढ़े जलस्तर का असर ताजपुर-बख्तियारपुर निर्माणाधीन फोरलेन सड़क पर भी पड़ा है। मोहनपुर प्रखंड के डुमरी गांव के पास फोरलेन के 11 नंबर पुल का एप्रोच पथ तेज बहाव के कारण करीब 40 फीट तक धंस गया, जिसके बाद सड़क पर दरारें भी दिखाई दीं।

घटना के बाद निर्माण एजेंसी की टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत और प्रोटेक्शन वर्क शुरू किया। निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर के अनुसार, नए पुल के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में पहली बार गंगा का जलस्तर इतना बढ़ा है। उनका कहना है कि नई मिट्टी के कारण एप्रोच पथ के धंसने की स्थिति बनी और कटाव को रोकने के लिए जरूरी काम किया जा रहा है।

समस्तीपुर में 2.33 लाख से अधिक लोग प्रभावित

समस्तीपुर के मोहिउद्दीन नगर, मोहनपुर समेत कई प्रखंडों में भी बाढ़ का असर गंभीर है। गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण जिले में 2.33 लाख से अधिक आबादी प्रभावित बताई गई है।

जिला प्रशासन ने राहत के लिए 81 सामुदायिक रसोई और 201 नावें तैनात की हैं। प्रशासन के मुताबिक, सामुदायिक रसोई के जरिए प्रतिदिन करीब 65 हजार लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा 32,515 पॉलिथीन शीट वितरित की गई हैं और 18 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। पशुओं के लिए 17 कैंप बनाए गए हैं और करीब 490 क्विंटल चारा भी वितरित किया गया है।

मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर

मुंगेर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। बरियारपुर प्रखंड के निचले और रिहायशी इलाकों में पानी भरने से स्थिति बेहद कठिन हो गई है। कई गांवों में घरों के भीतर काफी ऊंचाई तक पानी पहुंचने की सूचना है।

बाढ़ से प्रभावित कई परिवार मवेशियों के साथ NH-80 के किनारे रहने को मजबूर हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से रात के समय लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। शौचालयों में पानी भर जाने के कारण विशेष रूप से महिलाओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

राहत वितरण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

मुंगेर के कुछ बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों ने राहत सामग्री के वितरण को लेकर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि राहत सामग्री जरूरतमंद परिवारों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रही है और कुछ राहत केंद्र बाढ़ के पानी के कारण आसानी से पहुंचने योग्य नहीं हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों का सही सर्वे कराने और राहत सामग्री घर-घर पहुंचाने की मांग की है।

राहत सामग्री नहीं मिलने पर सड़क जाम

मुंगेर नगर निगम क्षेत्र के बेलवा घाट मुसहरी में राहत और भोजन की मांग को लेकर ग्रामीणों ने मुंगेर-पटना मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर अवरोध लगाकर यातायात रोका और टायर जलाकर विरोध जताया।

ग्रामीणों का कहना था कि कई दिनों से घरों में पानी भरा है और चूल्हा नहीं जल पा रहा है। इससे भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट पैदा हो गया है।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और मुंगेर-पटना मार्ग पर यातायात फिर से बहाल हो गया।

मौसम विभाग ने बारिश को लेकर जताई संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 8 सितंबर तक बिहार में 601.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। हालांकि, सितंबर में अब तक सामान्य से करीब 31 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में प्रशासन नदियों के जलस्तर, तटबंधों और प्रभावित इलाकों की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहा है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का नाव से जायजा लिया और जिला प्रशासन के राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने को कहा और केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

फिलहाल बिहार में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कुछ नदियों के जलस्राव में कमी से राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन कई इलाकों में जलस्तर अब भी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन के सामने राहत सामग्री, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ये भी पढ़ें: मुंबई में ‘NO’ कहना पड़ेगा भारी! कम दूरी की सवारी ठुकराई तो ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों पर होगा एक्शन

You may also like