मुंबई में आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक नई मांग उठी है। वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और कोस्टल रोड के पास हेलीपैड निर्माण का प्रस्ताव सामने आया है, ताकि किसी भी बड़ी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य तेजी से किया जा सके।
हाल ही में पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता और रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद अहम होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सुझाव दिया गया है कि मुंबई के प्रमुख समुद्री मार्गों के पास हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
क्यों जरूरी है हेलीपैड?
वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और कोस्टल रोड मुंबई के महत्वपूर्ण यातायात मार्ग हैं। यहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। यदि इन इलाकों में कोई बड़ा हादसा होता है, तो सड़क मार्ग से राहत पहुंचाने में ट्रैफिक और दूरी के कारण देरी हो सकती है।
हेलीपैड बनने से एयर एंबुलेंस और रेस्क्यू हेलिकॉप्टर सीधे घटनास्थल के पास उतर सकेंगे। इससे घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा और गंभीर स्थिति में जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
आपातकालीन तैयारियों को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में तेजी से बढ़ते ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ आपदा प्रबंधन की योजनाएं भी समानांतर रूप से विकसित होनी चाहिए। हेलीपैड की सुविधा न केवल सड़क दुर्घटनाओं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों में भी मददगार साबित हो सकती है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
हेलीपैड निर्माण की इस मांग के बाद अब निगाहें राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर हैं। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो मुंबई की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में एक बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
मुंबई जैसे महानगर में हर सेकंड कीमती होता है। ऐसे में वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और कोस्टल रोड के पास हेलीपैड की सुविधा भविष्य में कई जिंदगियां बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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