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Kunal Kamra: कुणाल कामरा का नया पोस्ट, ‘लोकतांत्रिक तरीके से एक कलाकार की हत्या कैसे की जाए?’

Kunal Kamra: कुणाल कामरा का नया पोस्ट, ‘लोकतांत्रिक तरीके से एक कलाकार की हत्या कैसे की जाए?’

Kunal Kamra: मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में कई बार कला और अभिव्यक्ति की आजादी चर्चा का केंद्र बन जाती है। हाल ही में, स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार उनके सोशल मीडिया पोस्ट और मुंबई पुलिस की कार्रवाई ने लोगों का ध्यान खींचा है। 1 अप्रैल, 2025 को उन्होंने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “एक कलाकार को लोकतांत्रिक तरीके से कैसे मारा जाए?” यह पोस्ट न सिर्फ विवादास्पद है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है। आइए, जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और इसकी पृष्ठभूमि क्या रही।

कुणाल कामरा, जो पहले से ही महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए चर्चा में थे, ने अपने नवीनतम पोस्ट में एक कदम और आगे बढ़ाया है। उनके इस पोस्ट में उन्होंने पांच बिंदुओं की एक मार्गदर्शिका दी, जिसमें बताया गया कि कैसे एक कलाकार को दबाया जा सकता है। उन्होंने लिखा, “आक्रोश इतना हो कि ब्रांड उनके साथ काम करना बंद कर दें, फिर इतना कि निजी और कॉर्पोरेट कार्यक्रम रद्द हो जाएं, और आखिर में हिंसा तक पहुंचे ताकि छोटी से छोटी जगहें भी अपने दरवाजे बंद कर लें।” उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में कलाकार के पास या तो अपनी आत्मा बेचने का विकल्प रह जाता है या चुपचाप मुरझा जाना। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों की अलग-अलग राय बंट गई। कुछ ने इसे साहसी कदम बताया, जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक उत्तेजना करार दिया।

मुंबई पुलिस की कार्रवाई

इस बीच, मुंबई पुलिस ने कुणाल कामरा के खिलाफ कार्रवाई को और तेज कर दिया है। 2 अप्रैल, 2025 को पुलिस ने उन्हें तीसरा समन जारी किया है, जिसमें उन्हें 5 अप्रैल को खार थाने में पेश होने के लिए कहा गया है। इससे पहले, पुलिस ने दो बार समन भेजा था, लेकिन कुणाल ने उनमें से किसी पर भी जवाब नहीं दिया। पहला समन 25 मार्च को और दूसरा 26 मार्च को जारी किया गया था, जिसमें उन्हें तुरंत पूछताछ के लिए हाजिर होने को कहा गया था। लेकिन जब वे नहीं आए, तो 31 मार्च को पुलिस की एक टीम उनके मुंबई स्थित घर, जो दादर में है, पहुंची।

हालांकि, कुणाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि पुलिस जिस पते पर गई, वहां वह पिछले 10 साल से नहीं रहते। उन्होंने लिखा, “ऐसे पते पर जाना, जहां मैं पिछले 10 वर्षों से नहीं रहा हूं, आपके समय और सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी है।” यह पोस्ट भी वायरल हो गया और लोगों ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने पुलिस की कार्रवाई को अनावश्यक बताया, जबकि अन्य ने कुणाल की बातों को ओवररिएक्टिंग करार दिया।

विवाद की शुरुआत

यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब कुणाल ने अपनी स्टैंडअप कॉमेडी शो ‘नया भारत’ में एकनाथ शिंदे पर एक पैरोडी सॉन्ग के जरिए तंज कसा था। इस सॉन्ग में उन्होंने शिंदे को “गद्दार” कहकर संबोधित किया था, जो 2022 में उद्धव ठाकरे की शिव सेना से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के लिए गया था। यह टिप्पणी शिव सेना के कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरी, और उन्होंने मुंबई के हैबिटेट सेंटर, जहां शो हुआ था, को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद, मुंबई पुलिस ने शिव सेना MLA मुरजी पटेल की शिकायत पर कुणाल के खिलाफ FIR दर्ज की, जिसमें उन्हें मानहानि और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप लगाए गए।

कुणाल ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वह अपनी बात पर कायम हैं और माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मजाक उड़ाना और नेताओं की आलोचना करना कानून के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब सिर्फ शक्तिशाली लोगों की तारीफ करना नहीं है।” इस बयान ने विवाद को और हवा दी, और सोशल मीडिया पर #KunalKamra और मुंबई पुलिस समन 2025 (Mumbai Police Summons 2025) जैसे ट्रेंड्स ने लोगों की राय बंटी।

कानूनी लड़ाई और जनता की प्रतिक्रिया

कुणाल ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और 28 मार्च को मद्रास हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी, जिसे कोर्ट ने 7 अप्रैल तक के लिए मंजूर कर दिया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि वे तमिलनाडु में रहते हैं और मुंबई पुलिस से गिरफ्तारी का डर है। इसके बावजूद, पुलिस ने कार्रवाई जारी रखी, और तीसरा समन जारी करना इस मामले में एक नया मोड़ लाया।

सोशल मीडिया पर लोग इस मामले पर बंटे हुए हैं। कुछ का मानना है कि कुणाल को अपनी बात कहने का हक है, जबकि अन्य कहते हैं कि नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचाना गलत है। ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर कई यूजर्स ने लिखा कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच की लड़ाई बन गया है। कुछ ने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव का नतीजा बताया, जबकि अन्य ने कुणाल की टिप्पणियों को अनावश्यक उकसावे के रूप में देखा।

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