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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: MPSC सुधार समिति के सचिव बने Tukaram Mundhe

Tukaram Mundhe
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महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) को जांच समिति का सचिव नियुक्त किया है। इस समिति की अध्यक्षता बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे।

पुणे में MPSC अभ्यर्थियों का 10 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त होने के बाद ये फैसला सामने आया है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे। सरकार ने जांच समिति गठित करने के साथ कई अन्य मांगों पर भी आश्वासन दिया है।
पांच सदस्यीय समिति करेगी कथित अनियमितताओं की जांच

महाराष्ट्र सरकार की ओर से गठित यह पांच सदस्यीय समिति MPSC की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं की जांच करेगी। समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी अधिकारियों और न्यायिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

समिति की संरचना इस प्रकार है:
  • दिलीप भोसले: समिति के अध्यक्ष और बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश।

  • तुकाराम मुंढे: समिति के सचिव और वरिष्ठ IAS अधिकारी।

  • लक्ष्मी गौतम: IPS अधिकारी।

  • गणेश पाटिल: पूर्व IAS अधिकारी।

  • पी. डी. नाईक: सेवानिवृत्त न्यायाधीश।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, समिति को लगभग दो महीने में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंपने का प्रस्ताव है। जांच का दायरा कथित पेपर लीक से जुड़े सभी संबंधित मामलों तक बढ़ाया गया है। अभ्यर्थियों को अपने पास मौजूद सबूत समिति के सामने रखने का अवसर भी दिया जाएगा।

कौन हैं Tukaram Mundhe?

तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। उन्हें प्रशासनिक कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। MPSC जांच समिति के सचिव के रूप में उनकी जिम्मेदारी जांच प्रक्रिया के संचालन और समिति के कामकाज से जुड़ी होगी।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अब समिति की जांच और उसकी सिफारिशों पर सभी की नजर रहेगी।

MPSC अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

पुणे में हुए आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के साथ कई अन्य मांगें भी उठाईं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख मुद्दे ये हैं:

  • 70 हजार पदों पर भर्ती: अगले तीन वर्षों में सरकारी विभागों के रिक्त पदों पर भर्ती की दिशा में काम करने का आश्वासन।

  • ग्रुप-C भर्ती में पद बढ़ाना: 2027 की ग्रुप-C परीक्षा के माध्यम से भरे जाने वाले पदों की संख्या दोगुनी करने पर सहमति।

  • प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले: आंदोलन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों और प्रतिनिधियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन।

  • परीक्षा व्यवस्था में सुधार: MPSC की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग।

इन फैसलों और आश्वासनों को लागू करने की प्रक्रिया पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार को लेकर क्या स्थिति है?

आंदोलन के दौरान MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई थी। आंदोलन समाप्त होने के बाद भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा की। हालांकि, छुट्टी पर जाना पद से इस्तीफा देने के समान नहीं है।

अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग और जांच के दौरान उनकी भूमिका को लेकर स्थिति को समझने के लिए सरकार के औपचारिक आदेशों तथा आगे के फैसलों पर नजर रखना जरूरी है।

अब आगे क्या होगा?

MPSC जांच समिति के सामने अब कथित पेपर लीक के मामलों की पड़ताल करने, उपलब्ध सबूतों की जांच करने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी होगी। समिति की रिपोर्ट से ये स्पष्ट होने की उम्मीद है कि किन मामलों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किन कदमों की जरूरत है।

महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये मामला बेहद महत्वपूर्ण है। जांच कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होती है तथा सरकार समिति की सिफारिशों पर किस तरह अमल करती है, इससे भर्ती प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

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