Hybrid Energy Project Begins: मुंबई की विशाल जल आपूर्ति प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, मध्य वैतरणा बांध (Middle Vaitarna Dam), अब न केवल पानी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस बांध पर एक हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना शुरू की है, जो सौर और जलविद्युत ऊर्जा (Hybrid Renewable Energy) का अनूठा संगम है। यह परियोजना न केवल मुंबई की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और लागत बचत की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। बीएमसी को उम्मीद है कि अगले 15 दिनों में वन विभाग से इस परियोजना के लिए अंतिम मंजूरी मिल जाएगी, और लगभग ढाई साल में बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।
मध्य वैतरणा बांध (Middle Vaitarna Dam) मुंबई को प्रतिदिन 455 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध कराता है, जो शहर की कुल जल आपूर्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। इस बांध की कुल भंडारण क्षमता 1.93 लाख मिलियन लीटर है। अब, इस बांध को ऊर्जा उत्पादन के लिए भी उपयोग करने की योजना बनाई गई है, जिसमें 26.5 मेगावाट हाइब्रिड बिजली (Hybrid Renewable Energy) उत्पन्न होगी। इस परियोजना में जलविद्युत से 20 मेगावाट और सौर ऊर्जा से 6.5 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी। बीएमसी ने वैतरणा सोलर हाइड्रो पावर जेनको कंपनी के साथ एक बिजली खरीद समझौता किया है, जो इस परियोजना को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस परियोजना की शुरुआत के लिए बीएमसी को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है। अब केवल राज्य सरकार से 4.9 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण की मंजूरी का इंतजार है, जो अगले 15 दिनों में मिलने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ नागरिक अधिकारी ने बताया कि मंजूरी मिलते ही बुनियादी ढांचे का काम शुरू हो जाएगा, हालांकि मानसून की स्थिति को ध्यान में रखकर काम की गति तय की जाएगी। इस परियोजना में दो 10 मेगावाट के जनरेटरों के माध्यम से 20 मेगावाट जलविद्युत और 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले फ्लोटिंग सौर पैनलों के जरिए 6.5 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न होगी।
यह परियोजना बिल्ड, ऑपरेट, और ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर आधारित है, जिसमें सेवा प्रदाता कंपनी अगले 25 वर्षों तक परियोजना के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी लेगी। इस परियोजना से उत्पन्न बिजली को 4.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा जाएगा, जो महाराष्ट्र राज्य विद्युत संचरण कंपनी के माध्यम से राज्य के ग्रिड में भेजी जाएगी। इसके अलावा, महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (एमएसईडीसीएल) के साथ भी बिजली खरीद का समझौता किया जाएगा। इस परियोजना से बीएमसी को विशेष रूप से पीसे पंजरापुर जल शुद्धिकरण केंद्र के लिए सालाना लगभग 9 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है।
पहले इस परियोजना का लक्ष्य 100 मेगावाट बिजली उत्पादन करना था, जिसमें 20 मेगावाट जलविद्युत और 80 मेगावाट सौर ऊर्जा शामिल थी। लेकिन, बीएमसी के लिए पानी की आपूर्ति प्राथमिकता है, इसलिए सौर ऊर्जा उत्पादन को फिलहाल 6.5 मेगावाट तक सीमित किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि भविष्य में, जब अधिक उन्नत तकनीक उपलब्ध होगी, तब बिजली उत्पादन की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। यह निर्णय पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए लिया गया है, क्योंकि बांध के जलाशय में अधिक सौर पैनल लगाने से पानी में ऑक्सीजन का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
इस परियोजना की शुरुआत का विचार सबसे पहले 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया था, जब उन्होंने मध्य वैतरणा बांध पर जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद, बीएमसी ने सौर ऊर्जा को शामिल करके इसे हाइब्रिड परियोजना में बदल दिया। यह परियोजना देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है, जिसमें किसी नगर निगम ने सौर और जलविद्युत ऊर्जा को एक साथ उपयोग करने की योजना बनाई है। इस परियोजना को लागू करने के लिए बीएमसी ने शापूरजी पालोनजी और महालक्ष्मी कोनल ऊर्जा के संयुक्त उद्यम, वैतरणा सोलर हाइड्रो पावर जेनको के साथ साझेदारी की है।
मध्य वैतरणा बांध, जिसे हिंदुहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मध्य वैतरणा बांध के नाम से भी जाना जाता है, 2012 में बनकर तैयार हुआ था। यह बांध 102.4 मीटर ऊंचा है और मुंबई की जल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस परियोजना के लिए 536 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन अब इसे 26.5 मेगावाट की क्षमता तक सीमित करने से लागत में भी कमी आई है। फिर भी, यह परियोजना बीएमसी के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि यह देश का पहला ऐसा नगर निगम होगा, जो हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा (Hybrid Renewable Energy) का उत्पादन करेगा।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फ्लोटिंग सौर तकनीक है, जिसमें सौर पैनल पानी की सतह पर तैरते हुए बिजली उत्पन्न करते हैं। यह तकनीक न केवल जमीन की बचत करती है, बल्कि पानी के वाष्पीकरण को भी कम करती है। इसके अलावा, यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है, क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करता है। बीएमसी ने पहले भी भांडुप जल परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम उठाए हैं, और यह परियोजना उस दिशा में एक और बड़ा कदम है।
यह परियोजना मुंबई के लिए एक नया रास्ता खोलेगी, जहां स्वच्छ ऊर्जा और जल संरक्षण एक साथ काम करेंगे। बीएमसी का यह प्रयास न केवल आर्थिक बचत का स्रोत बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मिसाल कायम करेगा। मध्य वैतरणा बांध पर यह परियोजना मुंबई को न केवल पानी, बल्कि स्वच्छ और सस्ती बिजली का भी भरोसेमंद स्रोत बनाएगी।
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