महाराष्ट्र की राजनीति में उत्तर भारतीयों, विशेषकर पूर्वांचल के लोगों की भूमिका सदैव निर्णायक रही है। हाल के महानगर पालिका चुनावों में इस प्रभाव को एक नई ऊंचाई देने का श्रेय उत्तर प्रदेश के बदलापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रमेश चंद्र मिश्र को जाता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में चलाए गए इस चुनावी अभियान में मिश्र ने न केवल एक ‘स्टार प्रचारक’ की भूमिका निभाई, बल्कि अपनी रणनीति से इतिहास रच दिया।
सघन प्रचार और अभूतपूर्व स्ट्राइक रेट
विधायक रमेश चंद्र मिश्र को भाजपा ने उन क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी थी जहाँ उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक भूमिका में थे। उन्होंने कुल 55 प्रत्याशियों के पक्ष में सघन प्रचार किया। चुनावी परिणाम जब सामने आए, तो वह चौंकाने वाले और भाजपा के लिए उत्साहजनक थे। मिश्र द्वारा प्रचारित 55 सीटों में से 51 प्रत्याशियों ने विजय श्री प्राप्त की। लगभग 93% का यह स्ट्राइक रेट किसी भी राजनेता की सांगठनिक कुशलता का प्रमाण है।
उत्तर भारतीय मतदाताओं का एकतरफा झुकाव
मुंबई और आसपास के महानगरों में पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश) के प्रवासियों की एक बड़ी आबादी बसती है। मिश्र ने अपने प्रवास के दौरान इन मतदाताओं के बीच गहरी पैठ बनाई। उनके राजनीतिक कौशल और सहज व्यवहार का ही परिणाम था कि उत्तर भारतीय मतदाताओं ने एकजुट होकर भाजपा और महायुति के पक्ष में मतदान किया।
मुख्य बिंदु: विधायक मिश्र की सफलता ने यह साबित कर दिया कि मुंबई में रह रहे उत्तर भारतीयों के बीच वे एक भरोसेमंद और प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं।
जौनपुर के लाल, मुंबई में कमाल
विधायक रमेश चंद्र मिश्र के प्रभाव का सबसे बड़ा उदाहरण उन प्रत्याशियों की जीत है जिनका संबंध सीधे तौर पर उनके गृह जनपद जौनपुर से है। जौनपुर मूल के निम्नलिखित प्रत्याशियों की जीत में मिश्र की रणनीति ने अहम भूमिका निभाई:
- विवेक उपाध्याय
- पंकज पाण्डेय
- रेखा राम यादव
- मनीषा कमलेश यादव
- मदन सिंह
इन पांचों प्रत्याशियों की जीत ने जौनपुर और मुंबई के बीच के राजनीतिक सेतु को और मजबूत किया है।
विधानसभा से निकाय चुनाव तक निरंतरता
यह पहली बार नहीं है जब रमेश चंद्र मिश्र ने महाराष्ट्र में अपना प्रभाव दिखाया हो। इससे पूर्व महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं। तब भी उन्होंने जिन क्षेत्रों में कमान संभाली थी, वहां भाजपा उम्मीदवारों को बड़ी जीत हासिल हुई थी। उनकी यह निरंतरता दर्शाती है कि वे महाराष्ट्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को बखूबी समझते हैं।
विधायक रमेश चंद्र मिश्र की इस सफलता ने उन्हें भाजपा के भीतर एक ‘क्राइसिस मैनेजर’ और ‘वोटर कनेक्ट’ वाले नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। महाराष्ट्र की धरती पर उत्तर भारतीयों का शत-प्रतिशत मत भाजपा की झोली में डालना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह आने वाले समय में महायुति की जड़ों को और मजबूती प्रदान करेगा।































