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मुंबई में वैचारिक मंथन, मोहन भागवत की व्याख्यान श्रृंखला ‘New Horizons’ शुरू

मोहन भागवत
मोहन भागवत

मुंबई: भारत के सबसे बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में से एक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने अस्तित्व के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करते हुए, मुंबई के वर्ली स्थित प्रतिष्ठित नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम में दो दिवसीय विशेष व्याख्यान श्रृंखला ‘न्यू होराइज़न्स’ (New Horizons) का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के केंद्र में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत हैं, जो दो दिनों तक राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे।

शताब्दी वर्ष का शंखनाद
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी, और वर्ष 2025-26 इसके शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। ‘न्यू होराइज़न्स’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सदी की यात्रा का सिंहावलोकन और आने वाली सदी के लिए एक दृष्टिकोण पत्र (Vision Document) की तरह है। आयोजकों का मानना है कि यह श्रृंखला बदलते वैश्विक परिवेश में भारत की भूमिका को परिभाषित करने की एक कोशिश है।

मुंबई में वैचारिक मंथन, मोहन भागवत की व्याख्यान श्रृंखला 'New Horizons' शुरू

दो दिनों का विस्तृत रूपरेखा
कार्यक्रम को दो विशिष्ट सत्रों में विभाजित किया गया है, ताकि विचारधारा और संवाद के बीच संतुलन बना रहे:

दिनांककार्यक्रममुख्य आकर्षण / विवरण
7 फरवरीमुख्य संबोधनडॉ. मोहन भागवत आरएसएस की विचारधारा, विकास यात्रा और भविष्य के ‘विज़न’ पर प्रकाश डालेंगे।
8 फरवरीसंवादात्मक सत्रप्रख्यात हस्तियों के साथ प्रश्न-उत्तर सत्र, जिसमें ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों पर सीधा संवाद होगा।

प्रथम दिन: विचारधारा और भविष्य का दृष्टिकोण
पहले दिन का सत्र पूरी तरह से ‘विज़न’ पर केंद्रित है। डॉ. भागवत इस पर चर्चा करेंगे कि कैसे संघ ने पिछले 100 वर्षों में सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी। उनके संबोधन में राष्ट्रीय मूल्यों, स्वदेशी गौरव और बदलते भारत की वैश्विक भूमिका जैसे विषयों के प्रमुखता से रहने की संभावना है।

द्वितीय दिन: संवाद से समाधान
दूसरा दिन लोकतांत्रिक चर्चा का गवाह बनेगा। इसमें शिक्षा, कला, उद्योग और रक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज डॉ. भागवत से संवाद करेंगे। यह सत्र न केवल जिज्ञासाओं का समाधान करेगा, बल्कि देश की विभिन्न चुनौतियों पर संघ के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करेगा।

विशिष्ट उपस्थिति और सामाजिक प्रभाव
इस व्याख्यान श्रृंखला की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें समाज के हर वर्ग के प्रभावशाली लोगों को आमंत्रित किया गया है:

  • शिक्षाविद: राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सांस्कृतिक मूल्यों पर विमर्श के लिए।
  • उद्योग जगत के नेता: आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक प्रगति पर चर्चा हेतु।
  • सांस्कृतिक हस्तियाँ: भारतीय परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए।

इस श्रृंखला का मूल उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता के सूत्रों को खोजना है, ताकि एक सशक्त और आधुनिक भारत का निर्माण हो सके।” — आयोजन समिति

‘न्यू होराइज़न्स’ व्याख्यान श्रृंखला मुंबई जैसे महानगर में वैचारिक क्रांति का सूत्रपात करने की क्षमता रखती है। यह आयोजन दर्शाता है कि आरएसएस अपने 100 वर्षों के अनुभव के साथ, आधुनिक भारत की आकांक्षाओं को समझते हुए नई ऊंचाइयों (Horizons) की ओर बढ़ने के लिए तैयार है।

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