मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय विमानतल (CSMIA) पर टैक्सी और कैब चालकों को नमाज़ अदा करने की अनुमति देने की मांग को राज्य सरकार ने सुरक्षा कारणों से खारिज कर दिया है। इस मामले में मुंबई हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां सरकार और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट परिसर या उसके बाहर शेड बनाकर नमाज़ की इजाजत देना संभव नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
मुंबई एयरपोर्ट पर टैक्सी, ऑटो, ओला-उबर चालकों के संगठन ने मांग की थी कि उन्हें एयरपोर्ट परिसर के बाहर एक शेड में नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाए, खासकर रमज़ान के दौरान। इस मांग को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी मतभेद देखने को मिले। जहां समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम ने इसका समर्थन किया, वहीं बीजेपी और उसके नेताओं ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
मामला बढ़ने पर ये मुद्दा विधानसभा तक पहुंचा और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पुनिवाला की खंडपीठ ने राज्य सरकार और MMRDA से इस संबंध में जवाब मांगा था। अपने जवाब में MMRDA ने कोर्ट को बताया कि एयरपोर्ट उच्च सुरक्षा क्षेत्र (हाई-सिक्योरिटी जोन) में आता है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के नियमित रूप से एकत्र होने से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया कि सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट परिसर के भीतर किसी वैकल्पिक स्थान की संभावना पर विचार किया जाए। कोर्ट ने ये भी सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो रमज़ान के महीने में अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को निर्धारित की गई है।
सरकार ने क्या दलील दी?
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि एयरपोर्ट और उसके आसपास का क्षेत्र संवेदनशील है। वहां सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस पर है और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रतिदिन पांच वक्त की नमाज़ के लिए लगभग 1500 से 2000 लोग एकत्र होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का दिन में पांच बार इकट्ठा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पास की मस्जिदों में जाने का सुझाव
अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित स्थल के पास ही तीन मस्जिदें स्थित हैं। इनमें से एक मस्जिद लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है, जहां पैदल करीब 13 मिनट में पहुंचा जा सकता है। दूसरी मस्जिद 1.3 किलोमीटर दूर है और तीसरी 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सरकार ने दलील दी कि टैक्सी और कैब चालकों के पास अपने वाहन होते हैं, जिससे वे नजदीकी मस्जिदों में जाकर नमाज़ अदा कर सकते हैं। इसलिए एयरपोर्ट परिसर में अलग से व्यवस्था करना आवश्यक नहीं है।
आगे क्या?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही, वैकल्पिक समाधान की संभावना पर विचार करने का निर्देश भी दिया है। अब सभी की नजरें 4 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।
ये मामला धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के बीच संतुलन का एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है।
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