महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने नागपुर में आयोजित NCP चिंतन शिविर में एक ऐसा बयान दिया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। उन्होंने खुलासा किया कि जुलाई 2023 में अपने चाचा और एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का साथ छोड़ने का उनका फैसला कोई व्यक्तिगत स्वार्थ या सत्ता की भूख का नतीजा नहीं था। बल्कि, ये कदम महाराष्ट्र को स्थिरता और विकास की राह पर ले जाने के लिए उठाया गया था। ये बयान न केवल उनकी मंशा को स्पष्ट करता है, बल्कि राजनीति में पारिवारिक रिश्तों और जनसेवा के बीच संतुलन की चुनौती को भी सामने लाता है।
चिंतन शिविर में खुला दिल
नागपुर में एनसीपी के चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में अजित पवार ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने शरद पवार का साथ क्यों छोड़ा? मैंने परिवार और व्यक्तिगत रिश्तों में तनाव क्यों झेला? मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये सत्ता या पद के लिए नहीं था। मेरा मकसद था महाराष्ट्र को स्थिर सरकार देना और उसकी प्रगति सुनिश्चित करना।” उनकी ये बात कार्यकर्ताओं के बीच जोश भर गई और ये दर्शाती है कि अजित पवार का फोकस राज्य की भलाई पर है।
महायुति गठबंधन और स्थिरता का मंत्र
अजित पवार ने बीजेपी और शिवसेना के साथ महायुति गठबंधन को भी सराहा। उन्होंने कहा, “हमारा गठबंधन आपसी सम्मान और महाराष्ट्र की प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता पर टिका है। मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं, जिनके नेतृत्व में न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश को स्थिरता मिली है।” पवार ने बताया कि पीएम मोदी ने हमेशा महाराष्ट्र के विकास के लिए उनकी मांगों को स्वीकार किया, जिससे राज्य को नई दिशा मिली।
चिंतन शिविर में अजित पवार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए रणनीति पर भी जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, “हमें जनता के बीच जाना होगा, उनकी शिकायतें सुननी होंगी और उनके सवालों का जवाब देना होगा। काम में देरी नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने ये भी कहा कि ये शिविर न केवल चुनावी रणनीति के लिए है, बल्कि भावी पीढ़ी को मजबूत नेतृत्व देने के लिए भी है।
अजित पवार का ये बयान हमें सिखाता है कि राजनीति में फैसले लेना आसान नहीं होता, खासकर जब वे पारिवारिक रिश्तों को प्रभावित करते हों। लेकिन अगर मकसद जनता की भलाई और राज्य का विकास हो, तो ऐसे कठिन फैसले जरूरी हो जाते हैं। अजित पवार का ये खुलासा न केवल उनकी दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि ये भी दिखाता है कि वो महाराष्ट्र की प्रगति के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं।
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