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NCP विलय विवाद: तटकरे का पलटवार और रोहित पवार की ‘डेडलाइन’ से गरमाई सियासत

NCP विलय विवाद
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NCP विलय विवाद: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों गुटों के संभावित विलय और भाजपा के हस्तक्षेप को लेकर चल रही चर्चाओं ने एक नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ अजित पवार गुट ने अपनी स्वायत्तता का दावा किया है, तो दूसरी तरफ शरद पवार गुट ने 9 फरवरी के बाद बड़े खुलासे के संकेत दिए हैं।

भाजपा का हमारे आंतरिक मामलों में दखल नहीं: सुनील तटकरे
राकांपा (अजित पवार) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पार्टी के निर्णयों में भाजपा के हस्तक्षेप के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • गठबंधन बनाम स्वायत्तता: हम एनडीए का हिस्सा हैं और भाजपा हमारी सत्ता की सहयोगी है, लेकिन पार्टी के आंतरिक फैसलों में भाजपा का कोई हस्तक्षेप नहीं होता।
  • विलय पर गेंद शरद गुट के पाले में: विलय की चर्चाओं पर तटकरे ने कहा कि पहले शरद पवार गुट को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जो लोग भाजपा की विचारधारा वाले एनडीए का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें अपनी ‘लाइन’ साफ रखनी होगी।
  • हादसे की जांच: अजित पवार के साथ हुई हालिया दुर्घटना पर उन्होंने कहा कि जांच जारी है और सच जल्द ही सामने आ जाएगा।

9 फरवरी के बाद मचेगा सियासी भूचाल?
उधर, नाशिक के ढकांबे गांव में विधायक रोहित पवार ने एक रहस्यमयी बयान देकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि वे 9 फरवरी (अजित पवार की ‘राजनीतिक तेरहवीं’ के संदर्भ में) तक कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन उसके बाद वह सब कुछ सार्वजनिक कर देंगे।

रोहित पवार के दावे के मुख्य बिंदु:

  • सबूतों के साथ खुलासा: रोहित ने दावा किया कि विलय की पूरी प्रक्रिया और चर्चाओं के दौरान वे स्वयं मौजूद थे। उनके पास ऐसे तथ्य और सबूत हैं जो राज्य की राजनीति की दिशा बदल सकते हैं।
  • तथ्यों की गोपनीयता: उन्होंने संकेत दिया कि अजित दादा के साथ जो भी संवाद हुआ, उसे वे उचित समय (9 फरवरी के बाद) पर जनता के सामने रखेंगे।

ऊँट किस करवट बैठेगा?
सुनील तटकरे का बयान जहां पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की कोशिश है, वहीं रोहित पवार की ‘डेडलाइन’ महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े तूफान की आहट दे रही है। 9 फरवरी की तारीख अब राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गई है, क्योंकि इसी दिन रोहित पवार के दावों की सच्चाई और राकांपा के भविष्य की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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