Pitru Paksha 2025: आज 8 सितंबर 2025 से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। यह दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है, जिसे महालय श्राद्ध का पहला दिन माना जाता है। इस खास मौके पर लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि पितृपक्ष में पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध के जरिए संतुष्टि पाते हैं।
पंचांग के मुताबिक, आज प्रतिपदा तिथि रात 9:11 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी। दिन में पूर्व भाद्रपद नक्षत्र रात 8:02 बजे तक रहेगा, फिर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शुरू होगा। आज धृति योग, शूल योग और गण्ड योग का प्रभाव रहेगा। करण की बात करें तो बालव, कौलव और तैतिल करण रहेंगे। पूरे दिन पंचक काल रहेगा, इसलिए शुभ कार्य जैसे गृह निर्माण, विवाह या यात्रा टालने की सलाह दी जाती है। पूर्व दिशा में दिशाशूल होने की वजह से इस दिशा की यात्रा से बचना चाहिए।
पितृपक्ष के पहले दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि पता नहीं होती या जिनका विधिवत श्राद्ध नहीं हुआ। खास तौर पर नाना-नानी या मातृ पक्ष के पितरों का श्राद्ध आज के दिन किया जाता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।
श्राद्ध करने के लिए घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और साफ वस्त्र पहनने चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके कुशा, जल, तिल और जौ के साथ पितरों के नाम से तर्पण करना चाहिए। ब्राह्मण भोजन और दान देना भी पुण्य का काम माना जाता है। दूध से बनी खीर, सफेद फूल, तिल, शहद, गंगाजल और सफेद वस्त्र श्राद्ध में खास माने जाते हैं। पंचबलि, गोदान, अन्न और वस्त्र का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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