Rupee vs Dollar: भारतीय मुद्रा रुपये ने लंबे समय बाद डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया एक झटके में 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। इस साल लगातार दबाव में रहने और एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहने के बाद रुपये में आई ये तेजी बाजार के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका सीधा असर रुपये की मजबूती के रूप में देखने को मिला।
सरकार के फैसले से बढ़ा विदेशी निवेशकों का विश्वास
केंद्र सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स को बड़ी राहत देते हुए सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की बिक्री अथवा उन पर मिलने वाले ब्याज से होने वाली कमाई पर लगने वाला कैपिटल गेन टैक्स समाप्त कर दिया है।
इस फैसले को लागू करने के लिए अध्यादेश के जरिए संबंधित कानून में संशोधन किया गया है। पहले विदेशी निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध शेयरों और बॉन्ड्स पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। नए प्रावधान से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार अधिक आकर्षक बन गया है।
RBI की नीतियों ने भी दिया समर्थन
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी विदेशी निवेशकों के लिए कुछ नियमों में ढील देने की घोषणा की है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने भरोसा दिलाया है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी बाहरी आर्थिक झटके का सामना करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है।
RBI ने ये भी स्पष्ट किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और संभावित महंगाई दबावों को देखते हुए फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा जाएगा। लगातार दूसरी बार रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे कर्ज लेने वालों को तत्काल राहत मिली है।
कारोबार के दौरान रुपये में दिखी मजबूत रिकवरी
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.72 प्रति डॉलर पर खुला और दिनभर के कारोबार में 95.24 के स्तर तक पहुंच गया। ये पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 50 पैसे की बड़ी मजबूती दर्शाता है।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.74 पर बंद हुआ था। ऐसे में शुक्रवार को दर्ज की गई तेजी को हाल के महीनों की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक माना जा रहा है।
NRI निवेशकों को भी मिला फायदा
RBI ने प्रवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) के लिए भी निवेश संबंधी नियमों में राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने इक्विटी आधारित निवेश उत्पादों में निवेश की सीमा बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे विदेशी पूंजी प्रवाह को और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या रहेगा असर?
विश्लेषकों के अनुसार यदि विदेशी निवेशकों का भरोसा इसी तरह बना रहता है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है, तो रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां आने वाले समय में रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
फिलहाल सरकार और RBI के संयुक्त कदमों ने भारतीय मुद्रा को राहत दी है और लंबे समय बाद रुपये ने डॉलर के मुकाबले अपनी ताकत का एहसास कराया है।






























