Samruddhi Mahamarg Accidents: महाराष्ट्र के आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक माना जाने वाला ‘समृद्धि महामार्ग’ अब रफ़्तार के शौकीनों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हालिया आंकड़ों ने राज्य सरकार और राजमार्ग पुलिस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जहाँ एक ओर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर कड़े सुरक्षा उपायों के कारण हादसों में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर समृद्धि महामार्ग पर मौतों का आंकड़ा डराने वाला है।
समृद्धि महामार्ग: रफ़्तार, नींद और लापरवाही का खूनी खेल
महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस द्वारा रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 समृद्धि महामार्ग के लिए बेहद घातक रहा है। सड़क सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद, मानवीय गलतियों और तकनीकी खामियों ने इस मार्ग को ‘एक्सीडेंट जोन’ में तब्दील कर दिया है।
| विवरण | वर्ष 2024 | वर्ष 2025 | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| कुल दुर्घटनाएं | 137 | 185 | 35% |
| कुल मौतें | 126 (लगभग) | 152 | 21% |
हादसों के मुख्य कारण:
- अत्यधिक रफ़्तार (Over-speeding): सीधी और सपाट सड़क होने के कारण चालक निर्धारित सीमा से कहीं अधिक गति से वाहन चलाते हैं।
- हाइवे हिप्नोसिस (Highway Hypnosis): लंबी और एकरस (monotonous) ड्राइविंग के कारण चालकों को नींद के झोंके आना या मानसिक सुस्ती छा जाना।
- लापरवाही: लेन कटिंग और टायर फटने जैसी घटनाओं पर नियंत्रण की कमी।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे: सुरक्षा उपायों से सुधरी स्थिति
समृद्धि महामार्ग के उलट, देश के सबसे व्यस्त मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। यहाँ सुरक्षा ऑडिट, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और सख्त पुलिसिंग के कारण दुर्घटनाओं के ग्राफ में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों का मानना है कि पुराने एक्सप्रेसवे पर लागू किए गए ‘जीरो फेटालिटी कॉरिडोर’ जैसे मॉडल को अब समृद्धि मार्ग पर भी कड़ाई से लागू करने की जरूरत है।
अधिकारियों की चेतावनी और सुरक्षा सुझाव
राजमार्ग पुलिस के अनुसार, 152 मौतों का आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि केवल अच्छी सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चालकों के व्यवहार में बदलाव लाना भी अनिवार्य है।
विशेषज्ञों की राय: समृद्धि महामार्ग पर यात्रा करने वालों को हर 2 घंटे में ब्रेक लेना चाहिए ताकि ‘हाइवे हिप्नोसिस’ से बचा जा सके। साथ ही, लंबी दूरी की यात्रा से पहले टायरों की स्थिति की जांच करना अनिवार्य है क्योंकि घर्षण (friction) के कारण तेज रफ्तार में टायर फटने की घटनाएं यहाँ आम हैं।
विकास के साथ सुरक्षा भी जरूरी
701 किलोमीटर लंबा यह महामार्ग महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति की जीवनरेखा है, लेकिन बढ़ता मृत्यु दर इसकी चमक को फीका कर रहा है। प्रशासन अब रडार गन, सीसीटीवी नेटवर्क और हर कुछ किलोमीटर पर ‘रंबल स्ट्रिप्स’ लगाने पर विचार कर रहा है ताकि रफ़्तार पर लगाम कसी जा सके।































