भारतीय राजनीति के दिग्गज और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र उनके जज्बे और जिम्मेदारी के सामने बौनी है। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के बाद, जब विपक्ष ने उनके रिटायरमेंट को लेकर तंज कसा, तब 85 वर्षीय पवार ने कोल्हापुर में एक ऐसी बात कही, जो हर दिल को छू गई। उन्होंने कहा, “जब मैं 85 साल की उम्र में राजनीति में सक्रिय हूं, तो मैं नरेंद्र मोदी को 75 की उम्र में रुकने के लिए कैसे कह सकता हूं? मुझे कोई नैतिक अधिकार नहीं कि मैं किसी से रिटायरमेंट की बात करूं।”
सवालों के बीच पवार की सादगी
दरअसल, पत्रकारों ने पवार से पूछा था कि क्या पीएम मोदी को लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की तरह 75 की उम्र में सार्वजनिक जीवन से हट जाना चाहिए? जवाब में पवार ने अपनी खास शैली में मुस्कुराते हुए कहा, “मैं कहां रुका हूं? मैं 85 साल का हूं और अभी भी देश की सेवा में जुटा हूं।” उनकी ये बात न सिर्फ उनकी ऊर्जा और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि ये भी बताती है कि वो राजनीति में तंजबाजी के बजाय सम्मान और नैतिकता को प्राथमिकता देते हैं।
मोदी के साथ एक खास याद
पवार ने एक भावुक पल को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वो 75 साल के हुए थे, तब खुद प्रधानमंत्री मोदी उनके घर शुभकामनाएं देने आए थे। पवार ने कहा, “राजनीति में संस्कृति और सभ्यता का होना जरूरी है। जब मैं 75 के बाद भी नहीं रुका, तो मैं मोदी को कैसे रोक सकता हूं?” ये बयान न केवल उनकी उदारता को दर्शाता है, बल्कि ये भी दिखाता है कि वो विरोधी दलों के बीच भी सम्मान की भावना को कायम रखते हैं।
राजनीति में उम्र का क्या महत्व?
पवार का ये बयान उस समय आया है, जब विपक्षी नेता पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर मार्गदर्शक मंडल का जिक्र कर तंज कस रहे थे। लेकिन पवार ने इस बहस को एक अलग दिशा दी। उन्होंने साफ किया कि राजनीति में सक्रियता उम्र से नहीं, बल्कि जज्बे और जनसेवा की भावना से तय होती है। उनकी ये बात उन तमाम नेताओं के लिए प्रेरणा है, जो उम्र को अपनी राह का रोड़ा मानते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
शरद पवार का ये बयान हमें सिखाता है कि उम्र के आंकड़े जिंदगी के जुनून को नहीं रोक सकते। उनकी सक्रियता और सादगी नई पीढ़ी के लिए मिसाल है। ये घटना हमें ये भी याद दिलाती है कि राजनीति में विरोध के बावजूद सम्मान और नैतिकता का स्थान सबसे ऊपर होना चाहिए। पवार के शब्द न सिर्फ राजनीति, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में प्रेरणा देने वाले हैं।
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