मुंबई

Duplicate Liquor Racket: 61.46 लाख की नकली शराब जब्त, सरगना फरार, 5 गिरफ्तार

Duplicate Liquor Racket: 61.46 लाख की नकली शराब जब्त, सरगना फरार, 5 गिरफ्तार

Duplicate Liquor Racket: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई कुछ न कुछ नया सुनना चाहता है, खासकर जब बात रोमांच और रहस्य से भरी हो। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा हाल ही में ठाणे जिले से सामने आया, जहां आबकारी विभाग ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की। एक छोटे से सुराग ने विभाग को नकली शराब के विशाल कारोबार तक पहुंचा दिया, जिसकी कीमत सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यह कहानी न सिर्फ रोचक है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे सजगता और मेहनत से बड़े-बड़े अपराधों का पर्दाफाश हो सकता है।

सब कुछ तब शुरू हुआ जब काशीमीरा इलाके में एक छोटे शराब तस्कर से 1.25 लाख रुपये की नकली शराब (Duplicate Liquor) बरामद हुई। यह कोई बड़ी बात नहीं लगती, लेकिन ठाणे आबकारी विभाग की टीम के लिए यह एक सुनहरा मौका था। इस छोटे से तस्कर ने जो राज खोले, उसने सभी को चौंका दिया। उसने बताया कि वह हर हफ्ते एक शख्स से नकली शराब की खेप लेता था और अगली डिलीवरी 4 मार्च को होने वाली थी। बस यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया।

आबकारी विभाग की टीम ने बिना वक्त गंवाए एक जाल बिछाया। मिरा रोड के चेतन वाइन्स के पास एक टेंपो को रोका गया। जब गाड़ी की तलाशी ली गई, तो उसमें कई कार्टन भरे हुए थे, जिनमें नकली भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) थी। ड्राइवर राहुल काटे और डिलीवरीमैन गणेश बांद्रे को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। इन दोनों से पूछताछ में इस गैरकानूनी धंधे का असली ठिकाना सामने आया—भिवंडी जिले का कोंगांव गांव।

जांच को आगे बढ़ाते हुए टीम कोंगांव के जांभुलवाडी इलाके में एक मकान तक पहुंची। वहां का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। एक छोटे से घर में नकली शराब का पूरा कारोबार चल रहा था। विभिन्न ब्रांड्स की बोतलों में नकली शराब भरी जा रही थी। वहां मौजूद दो और लोगों—पप्पू गुप्ता और नीलेश म्हात्रे—को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन इस पूरे रैकेट का सरगना, राकेश बलराम म्हात्रे, मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश अब भी जारी है।

इस छापेमारी में टीम ने भारी मात्रा में सामान जब्त किया। नकली शराब की बोतलें, खाली बोतलें, जाली लेबल और पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान—सब कुछ मिलाकर 61.46 लाख रुपये से ज्यादा कीमत का सामान बरामद हुआ। यह राशि सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह धंधा कितना बड़ा था। आबकारी विभाग के अधीक्षक प्रवीण तांबे और डिप्टी एसपी देशमुख ने इस ऑपरेशन को बड़ी सूझबूझ से अंजाम दिया, जिसकी अगुवाई आबकारी आयुक्त डॉ. राजेश देशमुख कर रहे थे।

यह पूरा मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हमारे आसपास क्या-क्या चल रहा है, जिसकी हमें भनक तक नहीं होती। एक छोटे से तस्कर से शुरू हुई यह जांच एक संगठित अपराध तक जा पहुंची। इस रैकेट के पीछे के लोग नकली शराब (नकली शराब / Duplicate Liquor) को असली ब्रांड्स की तरह पैक करके बाजार में बेच रहे थे। यह न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि लोगों की सेहत के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

अब तक पांच लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनके खिलाफ निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नकली शराब की सप्लाई और कहां-कहां हो रही थी। हर कदम पर नई जानकारी सामने आ रही है, जो इस मामले को और गहरा बनाती है।

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