ठाणे। वैश्विक संघर्षों की गूंज अब स्थानीय थालियों तक पहुँचने लगी है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी सैन्य संघर्ष का सीधा और कड़वा असर ठाणे के फलते-फूलते होटल व्यवसाय पर पड़ रहा है। कभी एलपीजी की किल्लत और आसमान छूती कीमतों से परेशान यह क्षेत्र अब ‘मैनपावर’ यानी कामगारों की भारी कमी से जूझ रहा है। ठाणे का होटल उद्योग इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, जहाँ एक तरफ खर्च बढ़ रहा है और दूसरी तरफ चलाने वाले हाथ कम हो रहे हैं।
गैस संकट: बढ़ती कीमतें और सीमित आपूर्ति
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बाधित हुई है। इसका सीधा असर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर पड़ा है। ठाणे के होटल व्यवसायियों का कहना है कि न केवल कीमतें बढ़ी हैं, बल्कि गैस की किल्लत के कारण उन्हें स्टॉक मिलने में भी देरी हो रही है। इस संकट ने होटलों के संचालन को निम्नलिखित रूप से प्रभावित किया है:
* कामकाज के घंटों में कटौती: गैस बचाने और लागत कम करने के लिए कई होटलों ने अपने खुलने और बंद होने के समय को सीमित कर दिया है।
* मेनू पर कैंची: जो व्यंजन ज्यादा गैस की खपत करते हैं, उन्हें अस्थायी रूप से मेनू से हटा दिया गया है।
* अस्थायी बंदी: कई छोटे होटल और ढाबे परिचालन लागत (Operating Cost) न निकाल पाने के कारण कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं।
कामगारों का पलायन: खाली पड़ गई रसोई
होटल उद्योग के लिए सबसे बड़ी चुनौती श्रमिकों का अपने गांवों की ओर लौटना है। ठाणे के अधिकांश होटलों में इस समय 50% से भी कम कर्मचारी बचे हैं। इस सामूहिक पलायन के पीछे मुख्य कारण हैं:
* आय में भारी गिरावट: गैस संकट और सीमित संचालन के कारण होटल मालिकों ने मजदूरी में कटौती की है या उन्हें काम के कम दिन मिल रहे हैं।
* असुरक्षित भविष्य: युद्ध के लंबे समय तक खिंचने की आशंका और अनिश्चित व्यापारिक स्थिति ने श्रमिकों के मन में डर पैदा कर दिया है।
* पारिवारिक दबाव: अनिश्चितता के इस माहौल में श्रमिक शहर में रहने के बजाय अपने गांव जाकर परिवार के साथ खेती या अन्य छोटे विकल्पों को बेहतर मान रहे हैं।
800 होटलों का अस्तित्व दांव पर
ठाणे में छोटे, मध्यम और बड़े स्तर के लगभग 800 से अधिक होटल संचालित होते हैं। इनमें से अधिकांश होटल ‘ब्रेक-ईवन’ (न लाभ, न हानि) की स्थिति पर चल रहे थे।
* मध्यम वर्गीय व्यवसाय सबसे ज्यादा प्रभावित: बड़े होटलों के पास बैकअप संसाधन हैं, लेकिन मध्यम और छोटे होटल स्टाफ के अभाव में ग्राहकों को सेवा नहीं दे पा रहे हैं।
* सेवा की गुणवत्ता में गिरावट: मांग होने के बावजूद स्टाफ कम होने से ग्राहकों को ऑर्डर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे व्यापार की छवि खराब हो रही है।
समाधान की तलाश में उद्यमी
ठाणे होटल एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों के लिए यह स्थिति ‘करो या मरो’ जैसी बन गई है। यदि पश्चिम एशिया में स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती और गैस की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तो आने वाले समय में ठाणे के फूड मार्केट में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। फिलहाल, होटल व्यवसायी सरकार से कमर्शियल गैस पर सब्सिडी और स्थानीय कामगारों को बढ़ावा देने वाली नीतियों की उम्मीद लगाए बैठे हैं।






























