मुंबई। महाराष्ट्र नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा और शिंदे गुट पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन की जीत को “अधूरी और कमजोर” करार देते हुए कहा कि महानगरपालिका के सदन में विपक्ष आज भी मजबूत स्थिति में है।
“4 सीटों का बहुमत, पूर्ण जीत नहीं”
संजय राउत ने कहा कि भाजपा–शिंदे गुट को केवल 4 सीटों का बहुमत मिला है, जिसे पूर्ण जनादेश नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, सदन में विपक्ष की संख्या और राजनीतिक ताकत इतनी है कि किसी भी वक्त सत्ता संतुलन बदल सकता है। हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि शिवसेना लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती है।
मुख्यमंत्री की ताकत सत्ता तक सीमित
मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए राउत ने कहा कि किसी भी नेता की ताकत सत्ता में रहने तक ही होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव सरकारी संसाधनों के दम पर लड़े गए, इसके बावजूद मुकाबला कांटे का रहा। राउत के अनुसार, इससे साफ है कि जनता का समर्थन पूरी तरह सत्ताधारी दलों के पक्ष में नहीं गया।
अजित पवार को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष का दावा
संजय राउत ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार को लेकर भाजपा के अंदर नाराज़गी है और उनकी सत्ता में स्थिति ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रह सकती। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में अजित पवार और शरद पवार की पार्टी के फिर से एक होने की संभावना बन सकती है।
उद्धव–राज ठाकरे की संभावित मुलाकात
राउत ने ये भी बताया कि चुनाव नतीजों के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच एक-दो दिन में मुलाकात हो सकती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े नेताओं के बीच संवाद और बैठकों का दौर देखने को मिल सकता है।
कम अंतर से हारी गईं कई सीटें
संजय राउत के अनुसार, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को 6 सीटें मिलीं, जबकि कई सीटों पर पार्टी बहुत कम वोटों से हार गई। शिवसेना (UBT) की भी करीब 12–13 सीटें ऐसी रहीं, जहां हार का अंतर बेहद कम था। उन्होंने कहा कि अगर ये सीटें जीत ली जातीं तो मुंबई की राजनीतिक तस्वीर बिल्कुल अलग होती।
“विपक्ष सदन की सबसे बड़ी ताकत”
राउत ने जोर देकर कहा कि संख्या बल के लिहाज से विपक्ष महानगरपालिका में एक बड़ी ताकत बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे आंकड़े हैं, जिनके आधार पर राजनीतिक समीकरण कभी भी बदल सकते हैं, लेकिन फिलहाल वे संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करेंगे।
ठेकेदारों और बड़े व्यापारियों पर निशाना
मुंबई की राजनीति पर बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि शहर को न तो बड़े व्यापारियों के हाथों में सौंपा जाएगा और न ही ठेकेदारों का राज चलने दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (UBT) के 100 से अधिक पार्षद हर फैसले पर कड़ी नजर रखेंगे और जनहित के खिलाफ कदमों का विरोध करेंगे।
‘जयचंद’ बयान से बढ़ा सियासी तापमान
हार की वजह बताते हुए राउत ने पार्टी के भीतर गद्दारी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी में ‘जयचंद’ पैदा न होते तो भाजपा की “100 पीढ़ियां भी मेयर नहीं बना पातीं।” इसी बयान के साथ उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वो हर राज्य में दल तोड़कर और भीतरघात कर चुनाव जीतने की रणनीति अपनाती है।
“शिंदे गुट का पतन तय”
संजय राउत ने दावा किया कि इस चुनाव के बाद शिंदे गुट का राजनीतिक पतन तय है और भविष्य में भाजपा को उनकी जरूरत नहीं रहेगी। उन्होंने ये भी कहा कि ये मानना गलत है कि मुंबई में भाजपा ने निर्णायक जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का उल्लेख करते हुए राउत ने कहा कि संसाधनों के बावजूद मुकाबला बराबरी का रहा और मुंबई किसी राजनीतिक सौदे का हिस्सा नहीं बनेगी।
कुल मिलाकर, BMC चुनाव 2026 के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच आरोप–प्रत्यारोप का दौर आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।
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