मुंबई/नवी मुंबई। सपनों के शहर मुंबई में घर खरीदना अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, लेकिन ‘तीसरी मुंबई’ (Third Mumbai) के उदय के साथ एक नई उम्मीद जागी है। महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) ने रायगढ़ जिले के पनवेल और उलवे क्षेत्र में एक विशाल आवासीय परियोजना लागू करने की कमर कस ली है। इस योजना के तहत 25 से 30 हजार किफायती घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो एमएमआर (MMR) क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी आवासीय परियोजनाओं में से एक होगी।
100 एकड़ जमीन पर म्हाडा की नजर
इस महा-परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए म्हाडा प्रशासन ने राज्य सरकार से संपर्क साधा है। म्हाडा की योजना पनवेल और उलवे के पास कलेक्टर क्षेत्र की लगभग 100 एकड़ जमीन प्राप्त करने की है। सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में राज्य सरकार के साथ बातचीत अंतिम दौर में है और जल्द ही भूमि हस्तांतरण पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।
क्यों है इस क्षेत्र में घरों की भारी मांग?
रायगढ़ जिले और विशेष रूप से पनवेल-उलवे बेल्ट में रियल एस्टेट की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। इसके पीछे तीन मुख्य बुनियादी ढांचागत (Infrastructure) कारण हैं:
* अटल सेतु (MTHL): मुंबई से नवी मुंबई की दूरी कम होने से कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आया है।
* नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: हवाई अड्डे के निर्माण ने इस पूरे क्षेत्र को ग्लोबल हब बना दिया है।
* प्रस्तावित तीसरी मुंबई: सरकार की योजना इस क्षेत्र को एक आधुनिक ‘विकास केंद्र’ (Growth Center) के रूप में विकसित करने की है।
आम आदमी के लिए ‘बजट फ्रेंडली’ विकल्प
निजी डेवलपर्स द्वारा बनाए जा रहे घरों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए घर खरीदना नामुमकिन सा हो गया है। म्हाडा की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘किफायती आवास’ उपलब्ध कराना है। सरकारी जमीन मिलने से निर्माण लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा आम जनता को लॉटरी के माध्यम से मिलने वाले सस्ते घरों के रूप में मिलेगा।
केंद्र और राज्य सरकार का साझा विजन
प्रधानमंत्री आवास योजना और केंद्र सरकार की ‘विकास केंद्र’ (Growth Centers) बनाने की नीति के तहत मुंबई और एमएमआर क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का मानना है कि केवल परिवहन (ट्रांसपोर्ट) सुधारना काफी नहीं है, बल्कि बढ़ती आबादी के लिए व्यवस्थित आवास की उपलब्धता भी अनिवार्य है।
* ट्रांसपोर्ट और आवास का संगम: जहाँ एक तरफ मेट्रो और अटल सेतु जैसे प्रोजेक्ट्स परिवहन को सुगम बना रहे हैं, वहीं म्हाडा की यह योजना आवास की कमी को दूर करेगी।
तीसरी मुंबई भविष्य का पावर हाउस है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यहाँ केवल अमीरों के महल न हों, बल्कि आम आदमी का भी अपना एक छोटा और सुंदर घर हो। 100 एकड़ जमीन के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
म्हाडा की यह 30 हजार घरों की योजना न केवल रियल एस्टेट मार्केट में संतुलन लाएगी, बल्कि पनवेल और उलवे के विकास को एक नई दिशा भी देगी। यदि सरकार जल्द ही जमीन आवंटित कर देती है, तो अगले कुछ वर्षों में हजारों परिवारों का ‘मुंबई में अपना घर’ होने का सपना हकीकत में बदल जाएगा।






























