Epstein Files: कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के नए खुलासों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी हालिया दस्तावेजों में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के साथ जो दरिंदगी सामने आई है, वह सभ्य समाज की कल्पना से परे है। इन फाइलों में हत्या, गायब होते बच्चे और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के संदिग्ध संबंधों का काला चिट्ठा दर्ज है।
जोरो रैंच: जहाँ इंसानों को ‘इनक्यूबेटर’ बनाया गया
न्यू मैक्सिको स्थित एपस्टीन का फार्म हाउस ‘जोरो रैंच’ किसी नर्क से कम नहीं था। फाइलों में दर्ज चौंकाने वाले विवरण के अनुसार:
- गला घोंटकर हत्या: दो विदेशी महिलाओं की यौन संबंधों के दौरान गला घोंटकर हत्या कर दी गई और एपस्टीन के कर्मचारी ने गिसेल मैक्सवेल की मदद से उन्हें इसी फार्म हाउस में दफना दिया।
- ह्यूमन इनक्यूबेटर: एक पीड़िता ने दावा किया कि लड़कियों को जबरन गर्भधारण (Forced Pregnancy) के लिए मजबूर किया जाता था। उन्हें ‘ह्यूमन इनक्यूबेटर’ की तरह रखा गया, जहाँ उन्होंने बच्चे पैदा किए और जन्म के तुरंत बाद वे बच्चे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए।
- क्रिप्टो का खेल: जांच में यह भी सामने आया है कि इस घृणित साम्राज्य को चलाने के लिए पारंपरिक बैंकिंग के बजाय बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि लेनदेन को ट्रैक न किया जा सके।
क्लोनिंग और ‘हत्या की अनुमति’ वाले ईमेल
इन फाइलों में एपस्टीन के वैज्ञानिक सनक की ओर भी इशारा मिलता है। लेखक और रेडियो होस्ट ब्रायन बिशप के साथ हुए ईमेल संवाद में ‘क्लोनिंग’ के करीब एक रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मांगी गई थी, जिस पर एपस्टीन निवेश के लिए तैयार था।
सबसे डरावना खुलासा 30 जून 2014 का एक ईमेल है, जिसमें एक अज्ञात व्यक्ति ने एपस्टीन से किसी को “मारने की अनुमति” मांगी थी। हालांकि इस पर एपस्टीन की प्रतिक्रिया और संदर्भ अभी भी धुंधले हैं।
ब्रिटेन में राजनीतिक संकट: कीर स्टारमर के इस्तीफे की मांग
एपस्टीन विवाद की आंच अब 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक पहुंच गई है। पीटर मंडेलसन विवाद से निपटने के तरीके को लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर चौतरफा घिरे हुए हैं।
- वेल्स के एक लेबर सांसद ने उनके इस्तीफे की मांग कर दी है।
- दबाव में आए स्टारमर ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से उन पीड़ितों से माफी मांगी है, जो इस मामले से आहत हुए हैं।
फाइलों में भारतीय कनेक्शन: पूर्व उच्चायुक्त का नाम
इन फाइलों में भारत के पूर्व उच्चायुक्त वाईके सिन्हा का नाम आने से भारत में भी खलबली मच गई है। सिन्हा, जो ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर रहे और बाद में भारत के मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त हुए, उनका नाम किस संदर्भ में लिया गया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
न्याय विभाग की बड़ी लापरवाही
एक ओर जहाँ ये खुलासे न्याय की उम्मीद जगा रहे हैं, वहीं अमेरिकी न्याय विभाग की लापरवाही भी सामने आई है। पीड़ितों की गोपनीयता बनाए रखने के दावों के बावजूद, कई नाबालिग पीड़ितों की तस्वीरें, फोन नंबर और पहचान सार्वजनिक हो गई है। विभाग ने इस भारी चूक को स्वीकार कर लिया है।
जेफ्री एपस्टीन की मौत के वर्षों बाद भी उसकी काली दुनिया के पन्ने जो हकीकत बयां कर रहे हैं, वह यह बताने के लिए काफी है कि सत्ता और पैसे के रसूख के पीछे मानवता का कितना क्रूर दमन हुआ।































