नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद के उच्च सदन, राज्यसभा में सोमवार को एक बार फिर विविधता और संवैधानिक गरिमा का अनूठा संगम देखने को मिला। महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए नवनिर्वाचित राकांपा (शरद चंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले सहित कुल 19 नवनिर्वाचित सदस्यों ने सदन की सदस्यता की शपथ ली। राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सभी नवनिर्वाचित सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शरद पवार का जज्बा: व्हीलचेयर पर पहुँचकर ली शपथ
शपथ ग्रहण समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल वह था जब महाराष्ट्र की राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले 85 वर्षीय शरद पवार व्हीलचेयर पर बैठकर शपथ लेने सदन के बीच पहुँचे। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उनके इस जज्बे की सभी ने सराहना की। पवार ने अपनी शपथ हिंदी भाषा में ली, जो राष्ट्रीय राजनीति में उनके कद और समन्वयकारी भूमिका को रेखांकित करती है।
विविधता का उत्सव: क्षेत्रीय भाषाओं में गूँजी शपथ
इस बार शपथ ग्रहण समारोह की खास बात यह रही कि सदस्यों ने अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय अस्मिता को प्राथमिकता दी। कुल 19 सदस्यों ने अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में शपथ ली:
* तमिलनाडु: 6 निर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली।
* पश्चिम बंगाल: 5 सदस्यों ने बांग्ला और अन्य भाषाओं में शपथ ली।
* ओडिशा: 3 सदस्यों ने उड़िया भाषा में शपथ ली।
महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व: हिंदी और मराठी का संगम
महाराष्ट्र से निर्वाचित पांचों सदस्यों ने भाषाई विविधता का सम्मान करते हुए अपनी शपथ पूरी की:
* शरद पवार (राकांपा-शरद): हिंदी में शपथ ली।
* रामदास आठवले (केंद्रीय मंत्री): हिंदी में शपथ ली।
* माया इवनाते: मराठी में शपथ ली।
* रामराव वाडकुटे: मराठी में शपथ ली।
* डॉ. ज्योति वाघमारे: मराठी में शपथ ली।
लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक
राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए उन्हें सदन की गरिमा और जनसेवा के प्रति समर्पित रहने की सीख दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार जैसे अनुभवी नेताओं की सदन में उपस्थिति चर्चाओं के स्तर को ऊँचा उठाएगी, वहीं आठवले जैसे जुझारू नेताओं की सक्रियता सदन में सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता देगी।
संसद के इस उच्च सदन में क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से शपथ लेना भारत की ‘विविधता में एकता’ के संकल्प को दोहराता है। अब इन 19 नए सदस्यों के शामिल होने से सदन की विधायी प्रक्रियाओं में नई ऊर्जा और विचार जुड़ने की उम्मीद है।































